हरियाणा सरकार ने गुड़गांव को गुरुग्राम घोषित कर दिया है। केंद्र सरकार से मंजूरी भी मिल गई है। भले ही नाम के बदलाव को लेकर मौजूदा भाजपा सरकार जायज ठहरा रही हो, लेकिन गुड़गांव का नाम बदलने से प्रदेश की ब्रांडिंग को झटका लगेगा।
सामान्य सी लगने वाली यह बात मल्टीनेशनल कंपनियों को काफी अखर रही है। आईटी-बीपीओ कंपनियों को भी नए सिरे से अपने नाम के साथ शहर की ब्रांडिंग करनी होगी।
आईटी सेक्टर को करीब 1000 करोड़ रुपये का झटका
दरअसल, सत्ता में भाजपा के आने के बाद प्रदेश आइकन कहे जाने वाले गुड़गांव के नाम बदलने को लेकर सरगर्मी शुरू हो गई थी। 13 अप्रैल को प्रदेश सरकार ने नाम में बदलाव करने पर मुहर लगा दी।
अब केंद्र सरकार ने नाम बदलने की मंजूरी दे दी है। हालांकि लोगों को उम्मीद थी कि साइबर सिटी, मिलेनियम सिटी जैसे नामों से जाना जाने वाला गुड़गांव का नाम बदलने पर केंद्र सरकार नहीं मानेगी। आईटी, बीपीओ और उद्योग जगत के लोगों ने भी इस बाबत मांग भी की थी, लेकिन इसका कोई फर्क नहीं पड़ा।
यहां के आईटी-बीपीओ, कॉरपोरेट और गारमेंट उद्योग का कारोबार अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन समेत अन्य यूरोपीय देशों में है। वहां गुड़गांव ब्रांड प्रसिद्ध है। अब गुरुग्राम होने से पुरानी ब्रांडिंग को खत्म करने के साथ नए सिरे से नई कवायद में जुड़ना होगा।
एक दशक से साइबर सिटी में आईटी-बीपीओ सेक्टर की हालत ठीक नहीं है। अब सरकार ने गुड़गांव को गुरुग्राम नाम देकर उनके समक्ष एक नई मुसीबत खड़ी कर दी है। आईटी-बीपीओ के अलावा प्रदेश सरकार को भी गुरुग्राम करोड़ों का पड़ेगा। सरकार को करोड़ों रुपये खर्च करने होंगे।