सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्केंडय काटजू ने किसी भी तरह के आरक्षण को गलत ठहराते हुए इसे महज एक राजनीतिक हथकंडा बताया। इसके अलावा अपनी पुरानी बातों पर भी वह कायम है।
विवादित बीफ बयान को दोहराते हुए कहा कि गाय एक जानवर है। जानवर को मां कहना समझदारी नहीं है। इस पर केवल राजनीति हो रही है। काटजू सोमवार को सेक्टर-55 स्थित अंसल यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे।
हरियाणा में चल रहे जाट आरक्षण के सवाल पर उन्होंने कहा कि आरक्षण केवल राजनीतिक एजेंडा है। राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए इसे जिंदा रखा जा रहा है। आरक्षण होना ही नहीं चाहिए।
आर्थिक और जाति दोनों आधार पर आरक्षण गलत है
मार्कंडेय काटजू ने कहा कि मेरी जिंदगी के सबसे अच्छे दिन अब जा चुके
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आर्थिक और जाति दोनों आधार पर आरक्षण गलत है। अगर किसी तबके को उठाना है, तो बेहतर है कि उन्हें शिक्षित किया जाए। गरीबों को बेहतर शिक्षा के लिए बंदोबस्त किया जाए। इसमें सरकार अभी तक कुछ खास नहीं कर पाई है। सरकारी स्कूलों में किताबें नहीं मिल रही है।
गरीब हो या अमीर हो आरक्षण का लाभ किसी को नहीं मिलना चाहिए। जस्टिस काटजू ने कहा कि मैं जातिगत या किसी भी आरक्षण के बिल्कुल खिलाफ हूं।चुनावी मुद्दों में सेकुलर शब्द पर हो रहे राजनीति पर उन्होंने कहा कि राजनेताओं ने सेकुलरिज्म की परिभाषा बदल दी है।
सोशल नेटवर्किंग साइट और सबने मिलकर बदलकर सेकुलर के अर्थ को बदल दिया है। अगर कोई हिन्दू दूसरे धर्म की बात करता है तो सेकुलर की ‘सिकुलर’ (बीमार मानसिकता) करार दिया जाने लगा है।
काटजू ने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर धर्म को ज्यादा नहीं मानता हूं
मार्कंडेय काट्जू
काटजू ने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर धर्म को ज्यादा नहीं मानता हूं, लेकिन राजनीति के कारण यह शब्द सुरक्षा के ज्यादा अब भय पैदा करने का काम कर रही है। मैं सेकूलर हूं और मुझे इस बात पर गर्व हैं। सेकूलर का मतलब अपने धर्म को मानने के साथ दूसरों के धर्म की इज्ज्त करना होता है।
बीफ विवाद में अपने पुरानी बातों को दोहराते हुए मार्केंडय काटजू ने कहा कि किसी जानवर को मां कहना कहां कि समझदारी है। बीफ पर केवल राजनीति राजनीति हो रही है।
खुद को गौभक्त कहने वाले खुद गोवा और केरल में जाकर बीफ खाते है। अगर एक धर्म आज गाय को मां कहता तो कोई धर्म किसी और जानवर को मां या बाप कहेगा। किसी को कुछ खाने से रोकने का हक किसी को नहीं है। वहीं एक अन्य मामले में उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी और जिन्ना ब्रिटिश एजेंट थे। असली देशभक्त शहीद भगत सिंह ही हैं।