पति पर नाजायज संबंधों के झूठे आरोप लगाना क्रूरता है और इससे इस बात को बल मिलता है कि जो महिला खुदकुशी करने की धमकी देती है उसके साथ रहना खतरे से खाली नहीं है। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी पति पत्नी के विवाद का निबटारा करते हुये की है। निचली अदालत ने पत्नी को क्रूरता का दोषी मानते हुये दंपत्ति को तलाक दिया था।
जस्टिस सिद्घार्थ मृदुल व दीपा शर्मा ने निचली अदालत के फैसले को कायम रखते हुये कहा ऐसे आरोपों से रिश्तों में हमेशा के लिये दरार आती है और इससे बेहद पीड़ा होती है और ऐसी पत्नी जो खुदकुशी करने की धमकी देती है उसके साथ रहना बेहद खतरनाक है।
हाईकोर्ट ने महिला के पति पर अपनी भाभी से आरोपों को खारिज करते हुये कहा ऐसे बेबुनियाद आरोप गंभीर व भारी क्रूरता के दायरे में आते हैं। महिला ने न केवल अपने पति पर बल्कि अपनी जेठानी पर झूठे बेबुनियाद आरोप लगाकर उनकी सम्मान को ठेस लगाई है। महिला ने न केवल अपने पति बल्कि अपनी जेठानी का चरित्र हनन किया है।
निचली अदालत ने दंपत्ति को अक्तूबर 2017 में क्रूरता के आधार पर तलाक दिया था। दंपत्ति का विवाह जुलाई 2008 में विवाह हुआ था। पति का आरोप था कि उसकी पत्नी झगड़ती है और उसे व उसके परिजनों के प्रति भद्दी भाषा का इस्तेमाल करती है और खुदकुशी करने की धमकी देती है।
दूसरी ओर महिला का आरोप था कि उसके पति के अपनी भाभी के साथ नाजायज संबंध थे और जब उसने विरोध किया तो उसे बाहर करने के लिये दोनों आपस में मिल गये। इस आरोप को अदालत ने मानने से इंकार कर दिया था।