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Delhi NCR News: आईसीएसई में उठा पर्यावरण शिक्षा, जल संरक्षण का मुद्दा

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फॉरेस्ट क्रिएटर्स के सह-संस्थापक ने गुजरात के नरगोल में तैयार किए गए जंगल की सुनाई कहानी
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संवाद न्यूज एजेंसी


नई दिल्ली। इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित 8वें इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन सस्टेनेबिलिटी एजुकेशन (आईसीएसई) 2026 का बृहस्पतिवार को समापन हो गया। मोबियस फाउंडेशन की ओर से आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में पर्यावरण शिक्षा और टिकाऊ विकास से जुड़े जमीन पर किए जा रहे कामों को सामने रखा गया। समापन दिवस पर जंगल बचाने, पानी के पारंपरिक तरीकों को फिर अपनाने और महिलाओं को मजबूत बनाकर जनसंख्या स्थिरीकरण जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।


फॉरेस्ट क्रिएटर्स के सह-संस्थापक डॉ. आरके नायर ने गुजरात के नरगोल में तैयार किए गए जंगल की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि समुद्र किनारे 1.20 लाख पेड़ लगाने की शुरुआत हुई तो स्थानीय लोगों ने इसे ‘पागल आदमी का जंगल’ कहकर मजाक उड़ाया था। आज वहां 60 से अधिक पक्षियों और 33 प्रजातियों की तितलियों की पहचान हो चुकी है। भारतीय स्टार कछुआ भी वहां देखा गया है। नायर के मुताबिक, उनकी संस्था ने 12 राज्यों में अब तक 138 जंगल तैयार किए हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की सीख बच्चों को कम उम्र से देनी चाहिए, ताकि प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी उनकी आदत का हिस्सा बने।
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बुंदेलखंड में पारंपरिक तरीके से बदली पानी की तस्वीर


पद्मश्री से सम्मानित उमाशंकर पांडे ने बुंदेलखंड में करीब 35 वर्षों के जल संरक्षण कार्य का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि एक समय इलाके में पीने का पानी पहुंचाने के लिए ट्रेन चलानी पड़ती थी। पारंपरिक जल संरक्षण और बारिश के पानी को रोकने के तरीकों से स्थिति में बदलाव आया। पांडे के अनुसार, उनके काम वाले क्षेत्र में भूजल स्तर करीब दो मीटर ऊपर आया है। उन्होंने युवाओं से पूर्वजों के पारंपरिक जल संरक्षण ज्ञान को अपनाने और आगे बढ़ाने की अपील की।
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महिला सशक्तीकरण से ही जनसंख्या स्थिरीकरण संभव


जनसंख्या स्थिरीकरण पर चर्चा में पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की कार्यकारी निदेशक पूनम मुत्तरेजा ने कहा कि इस मुद्दे को केवल आबादी के आंकड़ों के तौर पर नहीं देखना चाहिए। महिलाओं को अपने स्वास्थ्य और परिवार से जुड़े फैसले लेने की स्वतंत्रता देना भी इसका अहम हिस्सा है। मोबियस फाउंडेशन के चेयरमैन प्रदीप बर्मन ने बताया कि उन्होंने 2019 में संस्था की शुरुआत जनसंख्या और शिक्षा को प्रमुख उद्देश्य बनाकर की थी। मुत्तरेजा ने बताया कि मोबियस फाउंडेशन और पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया का ‘प्रोजेक्ट आकार’ उत्तर प्रदेश के बहराइच के 118 गांवों से शुरू हुआ था। अब यह सात जिलों के करीब 6,000 गांवों और लगभग 1.25 करोड़ लोगों तक पहुंच चुका है। समापन पर प्रदीप बर्मन ने युवाओं से सम्मेलन में सामने आए विचारों को अपने समुदाय और संस्थानों तक ले जाने की अपील की। उन्होंने कहा कि टिकाऊ विकास अब विकल्प नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है।
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