ओ-जोन विवाद पर सरकार से कार्रवाई की मांग, नियमितीकरण का रास्ता खोलने की अपील
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली से भाजपा सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने सोमवार को संसद में दिल्ली के ओ-जोन (ओखला फ्लड प्लेन) का मुद्दा उठाते हुए सरकार से 92 कॉलोनियों और 12 प्राचीन गांवों को ओ-जोन से बाहर करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसा होने पर करीब 15 लाख लोगों को राहत मिलेगी और इन क्षेत्रों के नियमितीकरण का रास्ता साफ होगा। बिधूड़ी ने नियम-377 के तहत यह मामला उठाया। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि 10 अगस्त 2010 को जिन क्षेत्रों को ओ-जोन में शामिल किया गया, उनमें कई ऐसी इमारतें और बस्तियां भी हैं, जिन्हें सरकार की अनुमति से विकसित किया गया था। इनमें दिल्ली सचिवालय, अक्षरधाम मंदिर, कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज और डीडीए की नियोजित रूप से विकसित मदनपुर खादर पुनर्वास कॉलोनी भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि ओ-जोन में शामिल 92 कॉलोनियों को सरकार पहले ही 24 मार्च 2008 को नियमित घोषित कर चुकी थी। इसके अलावा 12 प्राचीन गांव सदियों से आबाद हैं, लेकिन 2010 में इन्हें भी ओ-जोन में शामिल कर दिया गया, जिससे स्थानीय लोगों को विकास कार्यों और निर्माण संबंधी कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा सांसद ने सदन में यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने 28 सितंबर 2013 को इन कॉलोनियों और गांवों को ओ-जोन से बाहर करने के लिए मसौदा अधिसूचना (ड्राफ्ट नोटिफिकेशन) जारी की थी, लेकिन इसके बाद मामला लंबित पड़ा है। बिधूड़ी ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि लंबित प्रक्रिया पूरी कर इन 92 कॉलोनियों और 12 गांवों को ओ-जोन से बाहर किया जाए, ताकि उनके नियमितीकरण का रास्ता खुले और लगभग 15 लाख निवासियों को राहत मिल सके।