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कश्मीर और खालिस्तान के जरिये आतंक की साजिश रच रही आईएसआई, नारको टेरेरिज्म का लिया सहारा

Tue, 08 Dec 2020 04:02 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई खालिस्तानी आतंकियों के साथ मिलकर भारत में आतंक फैलाने की साजिश रच रही है। आतंकियों को फंडिंग के लिए अब नारको-टेरेरिज्म का सहारा लिया जा रहा है। नोटबंदी के बाद नकली नोटों का धंधा चौपट होने से आईएसआई और दूसरे आतंकी संगठनों ने ड्रग्स (हेरोइन-कोकीन) को अफगानिस्तान से कश्मीर भिजवाना शुरू कर दिया।

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इससे जुटाए गए रुपयों को आंतकी वारदात में इस्तेमाल किया जाने लगा है। पुलिस से मुठभेड़ में पकड़े गए संदिग्ध आतंकियों से बरामद दो किलो हेरोइन को बेचकर इन रुपयों को आतंकी घटनाओं के लिए इस्तेमाल किया जाना था। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई डबल-के (कश्मीर और खालिस्तान) के जरिए भारत में आतंक की जड़ें जमा रही है।

स्पेशल सेल के पुलिस उपायुक्त प्रमोद सिंह कुशवाहा ने बताया कि आईएसआई और खालिस्तानी आतंकियों के इशारे पर भारत में राइट विंग नेताओं की हत्या की साजिश रची  जा रही है। पंजाब का मोस्ट वांटेड गैंगस्टर व खालिस्तानी समर्थक सुखमीत पाल सिंह उर्फ सुख भिखारीवाल ने पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के इशारे पर भारत में टारगेट किलिंग शुरू करवा दी।
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आईएसआई के अलावा खालिस्तानी लिबरेशन फोर्स के चीफ हरमीत सिंह उर्फ पीएचडी (अब मृत है) और खालिस्तानी जिंदाबाद फोर्स के मुखिया लखबीर सिंह उर्फ रोड के इशारे पर सुख भिखारीवाल ने वारदातों को अंजाम देना शुरू किया। वर्ष 2016/17 में भिखारीवाल ने पंजाब में आठ राइट विंग  के नेताओं की हत्या शार्प शूटरों से करवा दी। 11 फरवरी 2020 को सुख भिखारीवाल ने अपने गुर्गो से हिंदू नेता हनी महाजन पर हमला करवाया।  

शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह संधू की हत्या करवाई
खालिस्तान का विरोध करने वाले शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह संधू की हत्या भी भिखारीवाल ने ही करवाई। तभी से दोनों संदिग्ध आतंकी व शार्प शूटर गायब थे। पूछताछ के दौरान गुुरजीत और सुखदीप ने बताया कि सुख भिखारीवाल ने जेल में बंद गैंगस्टर रविंदर सिंह उर्फ गियानी के जरिये दोनों को हायर किया था। इसके बाद लगातार वे भिखारीवाल के लिए काम कर रहे थे।कश्मीरी आतंकी अय्यूब पठान का सीधा संबंध हिजबुल से है। 

वह अपने चचेरे  भाई अब्दुल मजीद खान जो फिलहाल पाकिस्तान के रावलपिंडी में बैठा है, उसके इशारे पर काम कर रहा था। अब्दुल मजीद ने पाकिस्तानी कोड नेम सदाकत से अय्यूब को मिलवाया था। सदाकत ने ही अय्यूब व बाकी दोनों कश्मीरी युवकों को नारको टेरेरिज्म के लिए दो किलो हेरोइन व एक लाख कैश दोनों खालिस्तानी शूटरों को देने दिल्ली भेजा था, लेकिन उससे पूर्व ही पुलिस ने दोनों को दबोच लिया।

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