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...तब दलित भी हर गांव से बनेंगे कलेक्टर

Wed, 13 Apr 2016 04:21 PM IST
अमित कुमार निरंजन/अमर उजाला, नई दिल्ली
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आईआरएस प्रीता हरित - फोटो : अमित कुमार निरंजन
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बाबा साहब आंबेडकर के 125वीं जयंती वर्ष में आईआरएस अफसर (इंडियन रेवेन्यु सर्विस) ने दलितों और पिछड़ों को अशिक्षा के दलदल से निकालने की ठान ली है। दिल्ली में इंकम टैक्स कमिश्नर (भारत सरकार) के पद पर कार्यरत प्रीता हरित गांव की पृष्ठ भूमि से एससी-एसटी, ओबीसी के छात्रों को आईएएस, आईपीएस बनाने की तैयारी में जुटी हैं। इन्हें निःशुल्क क्लास दी जाएगी। 24अप्रैल से  दिल्ली में इन कक्षाओं की शुरुआत होगी।
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हरियाणा के बंचारी गांव(होडल तहसील) की मूल निवासी प्रीता हरित का मानना है कि 'जब आप अच्छे ओहदे पर रहकर बड़ी जिम्मेदारी निभाएं तो सम्मान अपने आप मिलता है।' नौकरी के साथ सामंजस्य की बात पर प्रीता बताती हैं कि मेरे साथ कई वॉलंटियर हैं जिनकी मदद से मैं योजनाबद्ध तरीके से इस कवायद को अंजाम दे रही हूं। बच्चों को पढ़ाना मेरी सामाजिक जिम्मेदारी। हमारे पास दो हजार से ज्यादा एसएमएस आ चुके हैं, जो इस सेवा का लाभ उठाना चाहते हैं।

प्रीता का कहना है कि यह प्रयास भले ही छोटा लगे लेकिन इसके दूरगामी परिणाम निकलेंगे। मेरी कोशिश है कि हर गांव से कम से कम एक दलित छात्र अफसर जरूर बने। इसके लिए हम भविष्य में विशेषज्ञों की मदद लेंगे।
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गौरतलब है कि 1964 में बुद्धिस्ट परिवार में जन्मीं प्रीता हरित को 22 साल की उम्र में ही सिविल सेवा परीक्षा में आरक्षित वर्ग से 22 वीं रैंक हासिल हुई थी और उन्होंने आईआरएस को चुना। प्रीता का कहना है कि मैं कभी मंदिर नहीं गई और न ही घर पर पूजा करती हूं। हमारे लिए बाबा साहब आंबेडकर और भगवान बुद्ध ही सबकुछ हैं।
     
समाज में होती है उपेक्षा : प्रीता बताती हैं कि मैं खुद जाटव बिरादरी से हूं। अगर मैं इस पद पर न होती तो मुझे इतना सम्मान न मिलता और मुझे भी समाज की उपेक्षा का शिकार होना पड़ता। हालांकि कई बार अभी भी ऐसा होता है। प्रीता कहती हैं कि जब भी कोई व्यक्ति मेरे साथ या किसी अन्य के साथ जातिगत भेदभाव करता है तब मुझमें इसे खत्म करने का संकल्प और दृढ़ होता जाता है।
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