फरीदाबाद के
मंधावली गांव के प्रगतिशील किसान मुकेश का ट्यूबवेल सूरज की पहली किरण के
साथ चल जाता है।
अब उसे रोजाना डीजल के लिए 500 रुपये खर्च नहीं करने
पड़ते। मुकेश ने ऊर्जा के बेहतर विकल्प सौर
ऊर्जा को समझते हुए अपने खेत में इससे चलने वाला सबमर्सिबल पंप लगवाया है।
मुकेश से प्रेरणा लेकर गांव के अन्य किसानों ने भी सौर ऊर्जा से चलने वाले
पंप के लिए आवेदन कर दिया है। जिसको देखकर यही लग रहा है कि सौर ऊर्जा की
के प्रति किसानों में जागरूकता आने लगी है।
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डीजल
के महंगे खर्च व पावर कट के त्रस्त किसानों के लिए सौर ऊर्जा वरदान साबित
हो रही है। सरकार की तरफ से किसानों को सौर ऊर्जा से चलने वाले सबमर्सिबल
पंप लगवाने के लिए 60 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है।
जिला अक्षय ऊर्जा
विभाग के प्रोजेक्ट अधिकारी राजेश हुड्डा के अनुसार जिले में अभी तक पांच
किसानों ने अपने खेतों में सौर ऊर्जा चलित पंप लगवा लिए हैं। एक दर्जन से
अधिक ने इसके लिए आवेदन किया हुआ है।
विभाग के अधिकारी भी गांवों में भ्रमण
करके किसानों को सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप के बारे में जागरूक कर रहे
है।
सौर ऊर्जा के प्रति पैदा हुई जागरूकता ने दो गुनी कर दी बागवानीकिसान
मुकेश बताते है कि पहले वह केवल ढाई एकड़ में बागवानी करते थे। इसके लिए
उन्हें प्रतिदिन 500 रुपये खर्च करके डीजल लाकर ट्यूबवेल चलाना पड़ता था।
प्रति माह डीजल का खर्च 15000 रुपये आता था। लेकिन सौर ऊर्जा चलित पंप
लगवाने से सारी परेशानी से मुक्ति मिल गई है।