बिल्डर्स पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती नोएडा के अन्य बिल्डरों के लिए सबक है। निवेशकों का कहना है कि समय पर पजेशन न देने वाले बिल्डरों को कोर्ट का आदेश मुश्किल में डाल सकता है।
यूनिटेक बिल्डर पर कोर्ट के सख्त रवैये के बाद निवेशकों के हौसले बुलंद हुए हैं। हालांकि, निवेशकों का कहना है कि 70 फीसदी निवेशक अभी भी रुपये नहीं बल्कि फ्लैट चाहते हैं, क्योंकि नया फ्लैट यदि लेने जाएंगे तो उसकी आसमान छू रही कीमतों को चुकाना संभव नहीं होगा।
सेक्टर-113 में यूनिटेक यूनीहोम्स-3 में फ्लैट बुक कराने वाले एन सरीन ने बताया कि राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) में यूनिटेक पर दो हजार केस हैं।
उन्होंने बताया कि उन्हें पजेशन 2014 में मिलना था, लेकिन अभी तक एक टॉवर की नींव खुदी है। 40 लाख की कीमत का थ्री बीएचके बुक कराया था। 10 टॉवर में ग्राउंड फ्लोर तक निर्माण हुआ है।
छह टॉवर में सात से 14 मंजिल तक बन गई है। सरीन ने कहा कि देरी से पजेशन पर बिल्डर पेनल्टी भी दे और फ्लैट भी, लेकिन रकम वापसी समझदारी नहीं है, क्योंकि बिल्डर पूरी रकम वापस नहीं करेगा और फ्लैटों की कीमतें आसमान छू रही हैं।
जिसे खरीदना संभव नहीं है। साथ ही पहले से ही ईएमआई और मकान के किराये पर काफी रकम निकल चुकी है। ऐसे में फ्लैट मिलना ही सही विकल्प है। वहीं सेक्टर 117 यूनिवर्ल्ड गार्डेन्स में फ्लैट बुक कराने वाले अमोलक नाथ सहगल ने कहा कि 2011 में पजेशन मिलना था और अब 2017 में पजेशन की बात बिल्डर कह रहा है। पूरे ब्याज समेत रकम बिल्डर लौटाएगा नहीं और नए फ्लैट बहुत महंगे हैं। ऐसे में रुपये वापस लेना समझदारी नहीं है।