दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहा इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में सौंदर्य, स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों के पवेलियन में महिलाओं को आकर्षित करने के लिए एक के साथ एक फ्री का ऑफर हाल के बाहर तक पहुंच गया है।
प्रगति मैदान के हॉल नंबर-18, खादी ग्रामोद्योग के अलावा कई अन्य राज्यों के पवेलियन में भी कॉस्मेटिक प्रोडक्ट मिल रहे हैं। इसमें हेयर कलर, क्रीम, ब्लीच, शैंपू, रोज वाटर, परफ्यूम, साबुन, मेकअप आदि का सामान की किट है। ये ऑफर लोगों को अपनी ओर खींच रहे हैं।
वहीं, डिफेंस पवेलियन के सामने फोकस कंट्री थाईलैंड का पवेलियन है। यहां आपको स्पेशल मसाज ऑयल मिलेंगे। कारोबारियों का दावा है कि इन ऑयल के प्रयोग से मोटापा से मुक्ति, सिर, पेट दांत, गर्दन और जोड़ों के दर्द से निजात पा सकते हैं। ग्राहकों को रिझाने के लिए एक के साथ एक फ्री के ऑफर बोर्ड भी टंग गए हैं।
फूड कोर्ट नहीं ग्राउंड पहली पसंद
बेशक ट्रेड फेयर इंटरनेशनल स्तर का हो, लेकिन दर्शकों को फूड कोर्ट में बैठने की जगह ही नसीब नहीं होती है। दर्शकों का आंकड़ा लाख पार कर चुका है, लेकिन अभी तक मेला परिसर में दर्शकों के खाने-पीने के लिए बेहतर जगह नहीं बनी है। न ही दर्शकों के आधार पर कुर्सियों का बंदोबस्त है। फूड कोर्ट के अंदर बैठने की जगह न मिलने के चलते दर्शक बाहर बने छोटे-छोटे ग्राउंड समेत फुटपाथ की रेलिंग पर बड़ी मुश्किल से बैठकर खाना खाते हैं।
खाना ले जाने की मिली छूट
ट्रेड फेयर शॉपिंग संग हॉट पिकनिक स्पॉट बन गया है। दर्शक देश-विदेश के पवेलियनों में संस्कृति, विरासत, हुनर जानने के अलावा प्रोडक्ट भी खरीद रहे हैं। फैमिली समेत लोग शॉपिंग के बाद आराम से बैठकर देसी-विदेशी जायकों समेत सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी लुत्फ उठा रहे हैं। फेयर में पब्लिक एंट्री के दूसरे दिन दर्शकों का आंकड़ा सवा लाख पार कर गया।
दर्शकों के लिए इस बार खुशखबरी यह है कि वे मेले में शापिंग के दौरान अपना खाना-पीना साथ ला सकते हैं। आईटीपीओ जनरल मैनेजर वी. मीरा के मुताबिक, सीनियर सिटीजन, बीमारों व बच्चों की तकलीफ को समझते हुए अनुमति दी गई है। हालांकि दर्शकों को सलाह दी जाती है कि वे कम से कम सामान लेकर आएं।बच्चों के गले में नाम-नंबर वाला कार्ड
साइट पर अपलोड कीजिए सेल्फी
प्रगति मैदान के हॉल नंबर 18 में सीमा शुल्क एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क का मंडप तीन रंगों से सजाया गया है। दर्शकों की सहूलियत के लिए यहां सेल्फी को सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अपलोड करने की सुविधा दी गई है। साथ ही बच्चों के लिए पेंटिग प्रतियोगिता व मैजिक शो भी आयोजित किया जा रहा है, जिसमें रोजाना विजेताओं को पुरस्कृत भी किया जाता है। बृहस्पतिवार को केंद्रीय राजस्व सचिव शक्ति कांता दास ने पवेलियन में सेल्फी ली। सीमा शुल्क एवं केन्द्रीय उत्पाद शुल्क की ब्रांड एंबेसडर मैरी कॉम और सुशील कुमार मंडप से बाहर, आइए टैक्स भरें, भारत को विश्व की ऊंचाई पर ले चलें का संदेश दे रहे हैं। इसके साथ ही मंडप में दर्शकों के लिए हेल्प डेस्क भी बनाई गई है।
मोदी विजन लेकर पहुंचे कश्मीरी पंडित
प्रधानमंत्री ने संसद फतह से पहले ही कश्मीरी पंडितों को साथ लेकर चलने का वादा किया था, जिसकी झलक ट्रेड फेयर में साफ देखने को मिल रही है। क्योंकि ट्रेड फेयर के इतिहास में पहली बार कश्मीरी पंडित जम्मू कश्मीर पवेलियन के माध्यम से व्यापार करने पहुंचे हैं।
ट्रेड फेयर में यूं तो जम्मू कश्मीर वर्षों से अपनी कारीगरी, कहवा व ड्राई फ्रूट को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखता रहा है, लेकिन इसमें कश्मीरी पंडितों की भागीदारी कभी नहीं रही। मेले में भाग लेने पहुंची कश्मीरी विस्थापित संतोष कौल के मुताबिक, पीएम मोदी ने कश्मीरियों को अपना मानते हुए साथ लेकर चलने का जो आश्वासन दिया है, उसी के चलते अब प्रदेश सरकार का रुख भी नरम पड़ा है।
मोदी विजन के चलते ही हमने पहली बार जम्मू कश्मीर इंडस्ट्री डायरेक्टर के पास ट्रेड फेयर में भाग लेने का आवेदन भेजा, जोकि पास हो गया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर कश्मीरी विरासत को दर्शाने का हक कश्मीरी पंडितों का भी है। हालांकि हालात के चलते आज हम अपने बच्चों को अपनी संस्कृति, विरासत व हुनर से रूबरू ही नहीं करवा पाते हैं, जिसका सदैव दुख रहता है।
वे कहती हैं कि मोदी के चलते ही जम्मू में रहने वाले विस्थापित कश्मीरी पंडितों ने गुरु तेग बहादुर सोसायटी बनायी है, जो श्रीनगर में रजिस्टर्ड है। इसमें आम महिलाओं को शामिल किया गया है।
फेरी लगाकर बेचती थीं शॉल
संतोष बताती हैं कि वर्ष 1990 में जब श्रीनगर से जम्मू पहुंचे तो खाने-पीने के भी लाले पड़ गए थे। पति अचानक बीमार पड़ गए और बच्चों की जिम्मेदारी भी मेरे कंधों पर आ गई। हम उन्हें पढ़ाना चाहते थे, ताकि वे देश में कहीं भी सिर उठाकर नौकरी कर सकें। मुझे कश्मीरी कढ़ाई करनी आती थी। मैंने घर में रहकर सूट, शॉल तैयार करने शुरू किए और उन्हें कंधे पर लटकाकर जम्मू समेत आसपास के इलाकों में फेरी लगाकर बेचती थी। करीब 10 से 12 साल तक मैंने फेरी के माध्यम से परिवार का पालन-पोषण किया।
बिहार पवेलियन ने जीता गोल्ड
ट्रेड फेयर का गोल्ड मेडल बिहार पवेलियन ने जीता है। बिहार पवेलियन के निदेशक संजय कुमार सिंह के मुताबिक, महिला उद्यमिता थीम पर आधारित मेले में बिहार पवेलियन आयोजकों ने सारा सामान व डिस्पले प्रोडक्ट भी मेले में आकर ही तैयार किए हैं। पवेलियन की डेकोरेशन उपेंद्र महारथी शिल्प अनुसंधान पटना द्वारा की गई है। खास बात यह है कि यहां बांस से ही पूरे पवेलियन को तैयार और डेकोरेट किया गया है।