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सूरजकुंड मेला: यहां दिखेगी एक से बढ़कर एक कला

Thu, 06 Feb 2014 03:01 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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वह न बोल सकते हैं और न सुन सकते हैं, लेकिन उनके द्वारा बनाए गए चित्र बोलते हैं। उनकी प्रतिभा को देखकर लोग दांतों तले अंगुली दबा लेते हैं। बात हो रही है श्रीलंका के निहाल संगाबोदियास की। मेले के श्रीलंका विलेज में उनका 910 नंबर स्टॉल है। वह ऑयल पेंटिंग के जरिए कैनवास पर अपनी भावनाएं उकेर देते हैं। उन्होंने न सिर्फ प्राकृतिक दृश्य बनाए हैं बल्कि हिंदू देवी-देवताओं को अपनी कूची से कैनवास पर उतारा है। उनके अंदर पेंसिल से 10 मिनट में चित्र बना देने की गजब की कला है। इसी के जरिए वह श्रीलंका की विभिन्न प्रदर्शनियों में पुरस्कृत हुए हैं और उन्हें अपने देश की ओर से लोक कला के संगम सूरजकुंड में अपनी प्रतिभा जा जादू बिखेरने के लिए भेजा गया है।
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हर सामान से आती है विशेष प्रकार की खुशबू

बेटीवर शिल्प के धनी कर्नाटक के मैथ्यू ने एक अनोखा करतब कर दिखाया है। उनका स्टाल मेला सचिवालय के बिल्कुल पीछे है। लोगों को उनके बेटीवर यानी खस का बना हुआ सामान काफी पसंद आ रहा है। मैथ्यू के बेटे बी. गंगाधर ने बताया कि बेटीवर शिल्प एक प्रकार की हर्बल रूट (जड़) होती है जो कर्नाटक के भटकल में पाई जाती है। इसमें विशेष प्रकार की खुशबू आती है जो वर्षों तक रहती है। इससे उन्होंने पेन स्टैंड, श्री गणेश, हाथी मुकुट, साबुन, चिड़िया घर, घोसला, झूला, मेट, हाथ से चलाने वाला पंखा आदि चीजें बनाई हैं, जिनकी कीमत 30 रुपये से लेकर 650 रुपये तक है। इसके लिए उन्हें स्टेट अवार्ड मिला है। इन चीजों से सुगंध आती है।

नारियल के छिलकों से बना दीं प्रयोग की चीजें

आमतौर पर हम उन वस्तुओं को फेंक देते हैं जो हमें बेकार लगती हैं। लेकिन इनोवेटिव व्यक्ति उस चीज का किसी न किसी रूप में प्रयोग कर लेता है। ऐसी की मिसाल पेश की है गांवा की नीलम लाठीकर ने। उन्होंने नारियल के झिलकों की चीजें तैयार की हैं। लाठीकर को लिम्का बुक अवार्ड के साथ-साथ नेशनल आवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। उनके पति नारियल के छिलकों से बनीं वस्तुओं के बारे में प्रशिक्षण देते हैं। उन्होंने नारियल के छिलकों से चाय, कॉफी मग, चूडियां, स्टैंड, टेबल लैंप आदि तैयार किए हैं। उनके स्टॉल पर 60 रुपए से लेकर 3000 रुपए तक की नारियल की बनी वस्तुएं रखी गईं हैं।

युवाओं के लिए डांस फ्लोर बना मेला

28वां सूरजकुंड क्राफ्ट मेला अब युवाओं का मेला बनता जा रहा है। वह हस्तशिल्प के बारे में जानकारी लेने नहीं, बल्कि गांव-देहात के वाद्ययंत्रों पर यहां थिरकने और दोस्तों के साथ मनोरंजन के लिए आ रहे हैं। पूरा मेला युवा जोड़ों के लिए डांस फ्लोर बन गया है। युवा कभी बंचारी की नगाड़ा, कभी बीन तो कभी कालबेलिया पार्टी की धुन पर धमाल मचा रहे हैं। बंचारी की नगाड़ा पार्टी के कलाकारों और युवाओं में तो बाकायदा डांस का मुकाबला हो रहा है। इसी प्रकार बीन की धुन पर भी युवा थिरकना नहीं भूलते। कभी चौपाल पर सिद्धिगोमा और ब्रज की लट्ठमार होली को देखकर भी वे थिरकने लग जाते हैं।
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बारिश ने शिल्पियों की नींद उड़ाई

अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड क्राफ्ट मेले में बारिश होने का रिकॉर्ड कायम है। बुधवार को सुबह हल्की बारिश हुई, जिससे मेले में आए शिल्पियों की नींद उड़ गई। आनन-फानन में सभी शिल्पियों और बुनकरों को पॉलीथिन मुहैया कराई गई। हालांकि, इस बार स्टॉल रेनप्रूफ बनाने का दावा किया गया है। थोड़ी देर की बारिश में ही मेले में कई जगह पर कीचड़ हो गया। ज्यादातर शिल्पियों ने बताया कि उनका सामान सुरक्षित है। अधिकारियों के मुताबिक, मेला प्रशासन ने पर्याप्त पॉलीथिन का इंतजाम किया है, जिसे क्राफ्टमैन ले सकते हैं। मेले में बाकायदा इसकी उद्घोषणा करवाई जा रही है। बारिश होने के कारण मेले में अपेक्षा के मुताबिक बहुत कम भीड़ रही।
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