उन्होंने शीर्ष अदालत के 6 मार्च, 2019 के आदेश का हवाला दिया जिसमें दिल्ली सरकार को दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर के लिए 10 दिनों के भीतर ईसीसी फंड से 265 करोड़ रुपये का योगदान करने का निर्देश दिया था, जिसमें कर देयता भी शामिल हैं।
दिल्ली के हिस्से के काम में हो रही देरी
एनसीआरटीसी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एएनएस नाडकर्णी ने कहा कि दिल्ली ने रकम नहीं दी है, जिस कारण दिल्ली के हिस्से का काम रुका पड़ा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में इस कॉरिडोर को पूरा किया जाना है। शीर्ष अदालत के मार्च 2019 के आदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें दिल्ली सरकार का योगदान 1,138 करोड़ रुपए बनता है। इसके बाद पीठ ने दिल्ली सरकार को ईसीसी फंड में पड़ी रकम में से 500 करोड़ रूपए आरआरटीएस के मद में देने के लिए कहा। सुनवाई के दौरान पीठ को यह भी जानकारी दी गई कि 500 करोड़ रुपए के बाद भी दिल्ली के पास 415 करोड़ रुपए का बकाया रहता है। जिस पर पीठ ने दिल्ली सरकार को इसके लिए बजटीय आवंटन करने के लिए कहा।
दिल्ली-अवलर कॉरिडोर पर निर्देश मांगे
न्याय मित्र सिंह ने पीठ को यह भी बताया कि दिल्ली-अलवर कॉरिडोर के लिए केंद्र की मंजूरी का इंतजार है। इस पर पीठ ने केंद्र के वकील को इस पर निर्देश लाने के लिए कहा। पीठ को यह भी जानकारी दी गई कि दिल्ली-पानीपत कॉरिडोर को लेकर दिल्ली सरकार की मंजूरी का इंतजार है। जिस पर पीठ ने दिल्ली सरकार की वकील को इस संबंध में निर्देश लाने के लिए कहा।