जंतर-मंतर पर शनिवार दोपहर करीब 12 बजे पुलिसकर्मी कुुर्सी पर बैठे धूप का आनंद ले रहे थे। वहीं, पास में ठंड से तड़पते एक शख्स की कराहने की आवाज आ रही थी। यह आवाज एक लावारिस शख्स की थी, जो दो दिन से खुले आसमान में सोने को मजबूर था। पुलिस की असंवेदनशीलता देखकर धरनास्थल पर सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ के जवानों ने आम लोगों से उसकी मदद का अनुरोध किया। इसके बाद लोगों ने 112 नंबर पर फोन कर मामले की जानकारी दी। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पीसीआर वैन ने बेसुध पड़े शख्स को अस्पताल ले गई।
सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए देश भर से लोग जंतर-मंतर पर आकर धरना देते हैं। लेकिन एक शख्स ऐसा भी था, जिसे सिर छिपाने के लिए कही जगह नहीं मिली तो उसने जंतर-मंतर के फुटपाथ को ही आशियाना बना लिया। शनिवार को ठंड बढ़ने से उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और कराहने लगा।
कराह की आवाज सुनकर पास में ड्यूटी पर तैनात सीआरपीएफ के जवान मदद के लिए पहुंचे। उसकी हालत देखकर ड्यूटी की बंदिशों के आगे सुरक्षाकर्मी मदद के लिए लाचार दिखे। किसी ने पास में ही कुर्सी पर बैठकर धूप का आनंद उठा रहे स्थानीय पुलिस से मदद के लिए कहा तो उन्होंने डायल 112 से मदद मांगने के लिए कहा।
इस पर केंद्रीय बल ने पास में खड़े कुछ लोगों से मदद का अनुरोध किया। तब जाकर किसी ने पीसीआर वैन से मदद मांगी। सूचना के दस मिनट बाद ही पीसीआर के जवान पहुंच गए और उसे गाड़ी में बैठाकर अस्पताल ले गए। राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती शख्स की पहचान अभी नहीं हो पाई है।