डीपीसीसी ने स्थापना सहमति वापस ली, संचालन की अनुमति भी रद्द, एनजीटी में उठा था संरक्षित क्षेत्र में प्लांट लगाने की मंजूरी का सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। वसंत कुंज के स्मृति वन स्थित मछली तालाब में संरक्षित रिज क्षेत्र के भीतर बिना जरूरी मंजूरी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाने और संचालित करने पर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) पर 1 करोड़ 50 लाख 60 हजार रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाया है। डीपीसीसी ने प्लांट के संचालन की अनुमति भी रद्द कर दी है।
समिति ने यह जानकारी राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दाखिल रिपोर्ट में दी है। मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी में यह सवाल उठा था कि संरक्षित रिज क्षेत्र में जल बोर्ड को एसटीपी लगाने की अनुमति किस आधार पर दी गई। डीपीसीसी की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने 3 नवंबर 2025 को स्पष्ट किया कि स्मृति वन में 1100 किलोलीटर प्रतिदिन (केएलडी) क्षमता का डिसेंट्रलाइज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (डीएसटीपी) संरक्षित साउथ-सेंट्रल रिज क्षेत्र में आता है। इसके बाद डीपीसीसी ने 2 फरवरी को डीजेबी को दी गई प्लांट लगाने की स्थापना सहमति वापस ले ली। अगले दिन 3 फरवरी को प्लांट चलाने की अनुमति के लिए डीजेबी का आवेदन भी खारिज कर दिया गया।
बिना वैध मंजूरी चल रहा था प्लांट
डीपीसीसी के मुताबिक, डीजेबी ने 20 अक्तूबर 2022 से प्लांट को बिना वैध पर्यावरणीय मंजूरी के संचालित किया। जांच में ट्रीटमेंट के बाद निकलने वाले पानी में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी), कुल निलंबित ठोस पदार्थ (टीएसएस) और केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (सीओडी) निर्धारित मानकों से अधिक मिले। यह पानी सीधे मछली तालाब में छोड़ा जा रहा था।
पहले 10 लाख का नोटिस, फिर बढ़कर हुआ 1.50 करोड़
डीपीसीसी ने शुरुआत में डीजेबी को 10 लाख रुपये के पर्यावरण मुआवजे का नोटिस दिया था। बाद में एनजीटी के निर्देश और निर्धारित नियमों के तहत दोबारा गणना की गई, जिसके बाद मुआवजे की राशि बढ़ाकर 1 करोड़ 50 लाख 60 हजार रुपये कर दी गई। डीजेबी का स्पष्टीकरण स्वीकार नहीं करते हुए डीपीसीसी ने 14 मई को अंतिम आदेश जारी किया। बोर्ड को 15 दिनों के भीतर राशि जमा करने का निर्देश दिया गया है।