फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोर्ट में गलत जानकारी देकर कैदी ने हासिल की अंतरिम जमानत, और बाद में...

Mon, 11 May 2020 06:29 AM IST
दुष्यंत शर्मा अरुण कुमार, नई दिल्ली
विज्ञापन
court order - फोटो : court order
विज्ञापन

कोविड 19 के खतरे के मद्देनजर एक विचाराधीन कैदी ने कोर्ट की आंखों में धूल झोंककर अंतरिम जमानत प्राप्त कर ली। जब मामले का खुलासा हुआ तो कोर्ट ने कैदी की जमानत खारिज करके उसे वापस जेल भेज दिया। इतना ही नहीं कोर्ट के साथ खिलवाड़ करने के लिए कैदी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई है।  यह मामला कड़कड़डूमा कोर्ट का है।

विज्ञापन


 मंडोली जेल में बंद भूषण कुमार नामक कैदी ने कोरोना वारयस के खतरे के चलते दिल्ली हाईकोर्ट की उच्चाधिकार प्राप्त समिति द्वारा कैदियों को अंतरिम जमानत देने की विशेष व्यवस्था का गलत फायदा उठाया। समिति ने 7 अप्रैल को विभिन्न आपराधिक मामलों में न्यूनतम 7 साल की सजा काट रहे कैदियों को अंतरिम जमानत पर छोड़ने का निर्णय लिया था, जिसके तहत अब तक काफी कैदियों को अंतरिम जमानत दी जा चुकी है।  

कैदी भूषण कुमार के खिलाफ पुलिस ने आईपीसी की धारा 420, 406, 467, 468, 471, 506 और 34 के तहत आरोपपत्र दायर किया था, लेकिन भूषण ने कोर्ट से अंतरिम जमानत पाने के लिए खुद पर 420 और 406 के तहत एफआईआर होने का दावा करते हुए 12 अप्रैल को कड़कड़डूमा कोर्ट से 45 दिन की अंतरिम जमानत प्राप्त कर ली।  आरोपी कैदी ने कोर्ट को आरोपपत्र में दायर अन्य धाराओं की जानकारी नहीं दी। 
विज्ञापन


आईपीसी की धारा 467 फर्जी कागजात बनाने, के तहत न्यूनतम 10 साल की कैद का प्रावधान है। इस बारे में पता लगने पर कैदी के विरोधी पक्ष ने अदालत में जमानत का विरोध किया। इस पर कोर्ट ने पुलिस और जेल प्रशासन से जवाब मांगा। 

इसके बाद खुलासा हुआ कि कैदी ने कोर्ट को गलत जानकारी देकर अंतरिम जमानत प्राप्त की। इस आधार पर कड़कड़डूमा कोर्ट की ड्यूटी एमएम गीता ने कैदी की अंतरिम जमानत खारिज करते हुए उसे वापस जेल में डालने का आदेश दिया। इसके साथ ही कोर्ट के साथ खिलवाड़ करने के तहत भी कैदी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने निर्देश दिए। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें