मोदी सरकार के कड़े फैसलों का असर रसोई दिखने लगा है। सब्जियों से लेकर आटे-दाल के भावों में बढ़ोतरी शुरू हो गई है।
रमजान के पवित्र महीने में रोजेदारों को थोड़ी अधिक महंगाई झेलनी पड़ सकती है। इसको लेकर रोजेदारों के चेहरे पर शिकन दिखने लगी है।
पिछले एक हफ्ते से बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। माल ढुलाई बढ़ने का प्रभाव भी अगले हफ्ते से दिखने लगेगा।
इस दौरान रमजान का महीना भी शुरू हो चुका होगा। ऐसे में रोजेदारों को भारी महंगाई झेलनी पड़ सकती है। चीनी के दाम दो रुपये प्रति किलो पहले ही बढ़ चुका है। थोक विक्रेताओं की मानें तो अगले सप्ताह से जीन्स के दामों में औसतन पांच फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है।
रजमान में इस्तेमाल होने वाली प्याज और आलू अभी से नखरे दिखा रहे हैं। इसी तरफ तकरीब सभी फलों के दाम पिछले सप्ताह के मुकाबले दस से बीस रुपये महंगा हो गया है।
सामग्री-----------पहले---अब (प्रतिकिलो भाव)
साधारण चावल------26-----28
आटा----------------19------21
चीनी----------------38-----40
आम----------------30-----50
केला----------------40-----60
खजूर--------------150-----180
सेब----------------200----160
अनार--------------100----120
चिकन-------------180----210
आलू---------------18-----25
प्याज--------------10-----25
हरी मिर्च----------12-----25
टमाटर------------08-----22
रमजान की तैयारियां शुरू
अभी रमजान की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। पिछले पंद्रह दिनों से रोजेदारों ने खाने-पीने के सामने इकट्ठे शुरू कर दिए हैं। मस्जिदों के बाद टोपी-रूमाल और जान-ए-नमाज की दुकानें सज गई हैं। कई मस्जिदों के उपर लाल-हरी बत्ती लगाई जा रही है ताकि रोजेदारों को सहरी और अफतार की जानकारी दी जा सके।
महंगाई से दुकानदार भी परेशान
मंहगाई का असर केवल आम जनता को ही प्रभावित नहीं कर रहा है। दुकनदार भी इसको लेकर खासे परेशान हैं। रमजान शुरू होने में चंद दिन रह गए। इसके बावजूद दुकानों में वह रौनक नहीं, जैसी पहले हुआ करती थी। पिनगवां के सब्जी विक्रेता नौरंग हुसैन का कहना है कि एक महिला पहले और आज के भावों में डेढ गुणा उछाल आया है। खरीदार आने कम हो गए हैं।
दुकानदार राजकुमार तनेजा का कहना है कि मुसलमान रमाजन से पहले दाल, चीनी, चावल, बूरा, आदि सामान एक महीने के लिए इकट्ठे ले जाते थे। मंहगाई की वजह से पूरा राशन नहीं खरीद रहे। समाजसेवी रमजान चौधरी का कहना है कि महंगाई डबल होने से रोजा रखने वाले मायूस हैं। इसका प्रभाव तैयारियों पर पड़ा है। लोग बेहद फि क्रमंद हैं। एडवोकेट फखरूद्दीन का कहना है कि लोग रोजा तो रखेंगे ही। लेकिन मंहगाई इस स्तर को पहुंच जाएगी यह उम्मीद नहीं थी। लोग जरूरत का सामान कम खरीदेंगे।