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Delhi NCR News: स्टेशनरी की दुकानों तक पहुंची महंगाई की मार, सामान के बढ़े दाम

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- कॉपी-रजिस्टर से लेकर पन्नी तक महंगी, अभिभावकों की बढ़ी चिंता
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संवाद न्यूज एजेंसी

नई दिल्ली। देश में लगातार बढ़ती महंगाई का असर अब शिक्षा के क्षेत्र पर भी असर डालने लगी है। नए शैक्षणिक सत्र के बीच स्टेशनरी के सामानों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। बाजार में कॉपी, रजिस्टर, किताबों पर चढ़ने वाली पन्नी व अन्य जरूरी सामान पहले के मुकाबले महंगे दाम में बिक रहे हैं। दुकानदारों के अनुसार रजिस्टर के दामों में करीब 5 से 7 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। वहीं जिन कंपनियों ने कीमतें नहीं बढ़ाई हैं, उन्होंने रजिस्टर और कॉपियों में पन्नों की संख्या कम कर दी है। लोगों ने कहा कि पहले जितने पन्नों वाला रजिस्टर मिलता था, अब उसी कीमत में कम पेज वाला सामान दिया जा रहा है।

स्टेशनरी कारोबारियों ने कहा कि पेपर की कीमतों में बढ़ोतरी इसका सबसे बड़ा कारण है। कागज महंगा होने से कॉपी, रजिस्टर और किताबों की लागत बढ़ गई है। वहीं किताबों और कॉपियों पर चढ़ाई जाने वाली प्लास्टिक पन्नी के दामों में भी इजाफा हुआ है। प्लास्टिक सामग्री महंगी होने के कारण पारदर्शी कवर और अन्य पैकिंग सामग्री की कीमतें बढ़ी हैं। दुकानदारों ने बताया कि ग्राहकों को सामान देने वाली प्लास्टिक पन्नी के प्रति बंडल पर करीब 20 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। इसके कारण कई दुकानदार अब ग्राहकों को पन्नी देने से बच रहे हैं या ग्राहक जब नहीं मानता है तभी देते हैं। अभिभावकों ने कहा कि बच्चों के नए सत्र की तैयारी अब पहले से कहीं अधिक महंगी हो गई है।
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क्यों बढ़ रहें हैं कागज के दाम ?


- कच्चे माल की लागत में लगातार बढ़ोतरी

- उत्पादन और बिजली खर्च में इजाफा

- तेल की कीमतें बढ़ने के कारण परिवहन लागत बढ़ी

-आकातित सामग्री महंगा होने से बढ़ा दवाब

भारत में 21 अप्रैल को कागज की कीमतें बढ़ी थी। भारत में मुख्य कंपनियों ने प्रति किलोग्राम दो से चार रुपये की बढ़ोतरी की थी। इससे पहले भी 16 मार्च को बढ़ोतरी हुई थी। लगातार कीमतें बढ़ने के कारण बाजार में इसका असर देखने को मिल रहा है।

-पेपर के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, इसलिए कॉपी और रजिस्टर महंगे हुए हैं। कई कंपनियों ने कीमत बढ़ाने के बजाए पन्ने कम कर दिए हैं। -मनोज गुप्ता, स्टेशनरी दुकानदार
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- प्लास्टिक कवर और पैकिंग सामग्री भी महंगी हो गई है। पहले जिस पन्नी का बंडल सस्ता मिलता था, अब उस पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। - मुकेश भाटिया, दुकानदार

- कच्चे माल और ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ने से स्टेशनरी बाजार भी प्रभावित हुआ है। ग्राहक भी बढ़े दामों को लेकर सवाल कर रहे हैं। - राजीव गर्ग, कारोबारी

- बच्चों के लिए नए सत्र की तैयारी काफी महंगी हो गई है। पहले से ही किताबें महंगी है और अब स्टेशनरी पर भी खर्च बढ़ता जा रहा है। - नीतू शर्मा, अभिभावक
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