कोरोना से गंभीर रूप से बीमार गर्भवती महिलाओं से उनके शिशुओं में संक्रमण नहीं फैल रहा। पिछले छह माह में पैदा होने वाले करीब 98 फीसदी शिशुओं की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव रही है। इससे पता चलता है कि ऐसे मामलों में यह वायरस मां से बच्चे में नहीं फैल रहा है, जो अच्छे संकेत हैं।
राजधानी के पांच प्रमुख अस्पतालों में छह महीने में करीब 741 संक्रमित महिलाओं की डिलीवरी की गई है। इन सभी अस्पतालों में मिलाकर 116 महिलाएं ऐसी भी भर्ती हुई थीं, जिनमें संक्रमण के गंभीर लक्षण
थे, लेकिन सिर्फ दो महिलाओं ने संक्रमित बच्चों को जन्म दिया। इसमें एक मामला एलएनजेपी का है और दूसरा सफदरजंग का।
अस्पतालों के डॉक्टरों ने बताया कि इन सभी अस्पतालों में कोरोना पीड़ित गर्भवती महिलाओं के लिए अलग से गायिनी वार्ड की व्यवस्था थी। शिशुओं के जन्म के 24 घंटे बाद उनका कोरोना टेस्ट किया गया, तो उनमें संक्रमण निगेटिव पाया गया।
यहां तक कि शिशु को जन्म देने पर या उसके दो हफ्ते बाद भी कोरोना से संक्रमित मां से उसके बच्चे को संक्रमण नहीं हुआ। इस दौरान इन महिलाओं से कहा गया था
कि वह अपने शिशु के संपर्क में रहने के दौरान हमेशा फेस कवर या मास्क पहनें। इसके अलावा दूध पिलाने से पहले हाथ धोने और स्नान करने की भी सलाह दी गई थी।
...इसलिए नहीं फैला संक्रमण
सफदरजंग अस्पताल के डॉ. जुगल किशोर बताते हैं कि यह वायरस रक्त कोशिकाओं की जरिये नहीं फैलता है। इस कारण मां से बच्चों में संक्रमण नहीं फैल रहा है। इसके अलावा गर्भाश्य की दीवारें नुकसान पहुंचाने वाले वायरस और बैक्टीरिया को भ्रूण तक पहुंचने से रोक लेती हैं। ये सिर्फ एंटीबॉडीज को जाने देती हैं, ताकि जन्म से पहले और जन्म के ठीक बाद किसी भी तरह के विषाणु से नवजात को सुरक्षित रखा जा सके।
इसके अलावा नवजात बच्चों के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता भी काफी अच्छी होती है। हालांकि जिन महिलाओं में वायरल लोड अधिक होता है (गंभीर लक्षण), उनसे शिशु के संक्रमित होने की संभावना होती है, लेकिन सिर्फ दो मामलों में ही ऐसा होना एक अच्छी बात है।
छह माह में इन पांच प्रमुख अस्पतालों में डिलीवरी
एलएनजेपी 331
सफदरजंग 110
आरएमएल 70
एम्स 105
जीटीबी 125