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‘2017 वर्ल्ड कप तय करेगा भारत का फुटबाल भविष्य’

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फुटबॉल के महाकुंभ में शरीक हो रहे 32 देशों के लोग जितने उत्साहित हैं, उससे कहीं अधिक भारतीय फुटबॉल प्रेमी इसको लेकर रोमांचित हैं।
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पूरे विश्व में जहां फुटबाल विश्वकप की चर्चा है, वहीं भारत के फुटबाल के भविष्य की भी बात हो रही है।

खिलाड़ी से लेकर खेल प्रेमी, हर कोई चाहता है कि एक दिन भारत भी विश्वकप में खेले। पेश है फुटबॉल विश्वकप को लेकर भारतीय महिला टीम के कोच अनादि बरुआ से खास बातचीत।

इस बार किसके जीतने की संभावना है?

उ. विश्वकप में भाग ले रही प्रत्येक टीम अपने आप में मजबूत है और विश्वकप जीतने की हकदार। लेकिन इनमें भी सबसे मजबूत ब्राजील, जर्मनी, स्पेन और अर्जेटीना हैं जो कि फाइनल में जगह बना सकती है। मेरे हिसाब से ब्राजील इस बार का वर्ल्डकप जीत सकती है।

प्र.ब्राजील के विश्वकप जीतने के प्रबल दावेदार होने का कारण?
उ. पहली बात मेजबान टीम में कोई कमजोरी नजर नहीं आती। साथ ही वर्ल्डकप में भाग लेने का लंबा अनुभव है। साथ ही सबसे अहम बात विश्वकप का आयोजन ब्राजील में होना है। निश्चित ही ब्राजील को स्थानीय परिस्थितियों का लाभ मिलेगा।

भारतीय फुटबॉल का क्या भविष्य दिखता है?

उ. यदि ठीक से फुटबाल पर ध्यान दिया जाए तो निश्चित ही एक दिन भारत भी फुटबाल विश्वकप में खेलता नजर आएगा। मेरा मानना है कि भारत के फुटबॉल के भविष्य का फैसला 2017 तय करेगा। जब देश में अंडर-17 का विश्वकप होगा। निश्चित ही 2017 का विश्वकप युवाओं में फुटबाल का क्रेज पैदा करेगा।

प्र. क्या भारत ने सुनहरे भविष्य की ओर कदम बढ़ाए हैं।
उ. आईपीएल की तर्ज पर इंडियन फुटबॉल लीग (आईएफएल) इस साल केअंत में आयोजित होगी। इससे जहां देश के फुटबॉल खिलाड़ियों को अपार अनुभव मिलेगा। साथ ही विश्वस्तरीय खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका भी। हम कह सकते हैं आईएफएल के आयोजन के साथ ही देश फुटबाल में अपने सुनहरे भविष्य की ओर कदम बढ़ा देगा।
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फुटबाल के बढ़ावे के लिए क्या जरूरी है?

उ. सबसे पहले स्कूली स्तर पर फुटबॉल को बढ़ावा देना जरूरी है। आवश्यकता है कि हर स्कूल अपने यहां छात्रों को फुटबॉल का प्रशिक्षण दिलवाए। साथ ही अभिभावक भी फुटबॉल में दिलचस्पी लें और बच्चों को प्रेरित करें।

प्र. फुटबाल को लेकर कमजोरी की वजह?
उ. हमारे देश में स्पोर्ट्स को लेकर अभिभावक मायूस हैं। विशेषकर फुटबॉल को लेकर। हालांकि 2012 के बाद जागरूकता आई है। अब जाकर मां-बाप अपने बच्चों को फुटबॉल प्रशिक्षण दिलवाने लगे हैं। लेकिन यह नाकाफी है।

प्र. एशिया को फुटबाल में आप कहां देखते हैं।
उ. हालांकि एशिया अन्य महाद्वीपों के मुकाबले फुटबॉल में काफी पीछे है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं की हमारा भविष्य अंधकारमय है। हमने पिछले कुछ समय में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। इसका ही नतीजा है की जापान की महिला टीम ने विश्वकप जीता। साथ ही भारत 52 से 49 वे नंबर पर आ गया है। हम फुटबॉल के स्तर में सुधार कर रहे हैं लेकिन काफी धीमी गति से।
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