प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के बाद अब केंद्र सरकार पूरे देश में ई-हेल्थ व्यवस्था करेगी। इसके लिए सरकार राष्ट्रीय ई-हेल्थ प्राधिकरण का गठन करने जा रही है
प्रथम चरण के रूप में इंडिया हेल्थ इंफोर्मेशन नेटवर्क (आईएचआईएन) का गठन कर सरकार ने पूरे देश में ई-हेल्थ लागू करने के लिए कमेटी गठित की थी। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट दे दी है।
आईएचआईएन के गर्वनेंस एंड स्ट्रक्चर कमेटी के चेयरमैन राजेंद्र प्रताप गुप्ता ने आईटी के जरिये स्वास्थ्य सेवा में क्रांति की रूपरेखा तैयार की है।
तीन महीने का ई-हेल्थ एजेंडा तय करने का सुझाव
बुधवार को गुड़गांव में आयोजित डिजिटल हेल्थ समिट में शिरकत करने आए राजेंद्र प्रताप गुप्ता ने बताया कि देश में जितनी स्वास्थ्य सेवाओं के सामने समस्याएं है, वो ई-हेल्थ के लिए अवसर है।
इसी टैगलाइन के साथ पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर आईएचआईएन का ई-हेल्थ मॉडल सरकार को सौंपा गया है। अगले छह महीने में पूरे देश में ई-हेल्थ व्यवस्था बतौर पायलट प्रोजेक्ट राष्ट्रीय राजधानी और बड़े शहरों में शुरू की जाएगी।
ई-हेल्थ को लागू करने के लिए कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में हर तीन महीने का ई-हेल्थ एजेंडा तय करने का सुझाव दिया है। छह सरकारी और छह प्राइवेट सेक्टर के स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के साथ मिलकर एडवाइजरी कमेटी बनाने का निर्णय लिया गया है।
मोबाईल एप्लीकेशन के जरिए बनेगी पहुंच
जो पूरे देश में ई-हेल्थ सेवा पर निगरानी करेगी। ई-हेल्थ में ई-हॉस्पिटल और टेली मेडिसिन जैसी सुविधा शामिल हैं। टेली मेडिसिन सर्विस शुरू होने के बाद मरीजों को एम्स जैसे बड़े अस्पतालों में इलाज के लिए लंबी लाइन नहीं लगानी पड़ेगी।
मरीज देश के किसी भी कोने में बैठकर एम्स में इलाज के लिए ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट ले सकेगें। इंर्फोमेशन नेटवर्क के जरिए हरेक बीमारी का डाटा तैयार किया जाएगा। जिससे भविष्य में ई-हॉस्पिटल जैसी स्कीम शुरू की जाएगी।
जिससे दूर-दराज के गांवों भी अच्छी मेडिकल सर्विस पहुंच सकेगी। कमेटी के चेयरमैन राजेंद्र प्रताप गुप्ता ने बताया कि सभी मेडिकल कॉलेज, रिसर्च इंस्टीट्यूशन और हेल्थ सेवा प्रदाता का नेटवर्क तैयार करने का सुझाव दिया गया है।
केंद्रीय स्कीम की निगरानी और गांवों तक इसकी पहुंच के लिए मोबाइल एप्लीकेशन तैयार किए जाएंगे।