योजना के तहत प्रतियोगी परीक्षा जेईई, नीट, सीयूईटी, सीएलएटी और एनडीए की तैयारी अब सरकारी स्कूलों से ही शुरू कराई जाएगी। इसके लिए विशेष ऑनलाइन पोर्टल, नियमित टेस्ट और प्रगति मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया गया है। मल्टी-सेक्टोरियल स्किल लैब्स में रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजाइन और मेकाट्रॉनिक्स जैसे विषय सिखाए जाएंगे और 175 नई आईसीटी लैब्स में 7,000 कंप्यूटर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जबकि 100 से अधिक डिजिटल लाइब्रेरी और 175 से ज्यादा लैंग्वेज लैब स्थापित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि करियर लैब में छात्रों की रुचि और क्षमता का आकलन कर उन्हें उच्च शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के लिए मार्गदर्शन दिया जाएगा। साइंस ऑफ लिविंग स्पेस के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य, नैतिक शिक्षा और व्यक्तित्व विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा। बहुभाषी शिक्षा और विदेशी भाषाओं के प्रशिक्षण से छात्रों को अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों और उद्योगों से जुड़ने के अवसर मिलेंगे। पहली बार सरकारी स्कूलों में उद्योगों के सहयोग से अनिवार्य इंटर्नशिप भी शुरू की जा रही है।
दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि अब डिजिटल और तकनीक-सक्षम शिक्षा पूरी दिल्ली में समान रूप से उपलब्ध कराई जा रही है। उनके अनुसार यह मॉडल केवल परीक्षा परिणामों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छात्रों को आईआईटी, मेडिकल कॉलेजों, विदेशी विश्वविद्यालयों और उद्यमिता के अवसरों तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। सरकार का दावा है कि यह पहल दिल्ली को वैश्विक शिक्षा मानकों के अनुरूप नई पहचान दिलाएगी।