भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए राजधानी में सभी सुरक्षा एजेंसियों के साथ ही सरकार भी अलर्ट मोड पर है। पुलिस से लेकर डॉक्टरों तक की छुट्टियां रद कर दी गई हैं। जो भी अधिकारी छुट्टी पर हैं उन्हें बुलाने के आदेश दे दिए गए हैं।
आपात स्थिति से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने आईटीओ स्थित पीडब्ल्यूडी मुख्यालय पर हवाई हमले से बचने के लिए सायरन का परीक्षण किया। अस्पतालों में एहतियातन आपदा वार्ड को सतर्क कर दिया गया है और सभी प्रकार की जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करा दी गई हैं।
मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि दिल्ली सरकार आपातकाल के लिए पूरी तरह तैयार है। दिल्ली में सायरन लगाने का काम शुरू हो गया है। अगले 1-2 दिनों में 40-50 सायरन ऊंची इमारतों पर स्थापित कर दिए जाएंगे। इन सायरनों की रेंज 8 किलोमीटर है और इन्हें एक केंद्रीय कमांड सेंटर से नियंत्रित किया जाएगा। आपात स्थिति में ये सायरन 5 मिनट तक बजेंगे।
पीडब्ल्यूडी भवन एक ऊंची इमारत होने के कारण यहां सायरन का परीक्षण किया गया। इसका नियंत्रण राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के पास होगा। सायरन के लिए उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों, मुख्य सचिव और दिल्ली पुलिस आयुक्त सहित सभी प्रमुख अधिकारियों को सूचित किया गया है।
दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि सभी जिला पुलिस उपायुक्त ने जिले के व्हाट्सएप ग्रुप में छुट्टी निरस्त करने के आदेश दिए हैं।
आपदा वार्ड में 10 से लेकर 70 तक बिस्तर आरक्षित किए गए हैं। इन्हें जरूरत के आधार पर बढ़ाया भी जा सकता है। इनका इस्तेमाल आपदा प्रभावित मरीजों के इलाज के लिए किया जाता है।
दिल्ली में 26 जनवरी, 15 अगस्त सहित दूसरे बड़े आयोजन, भूंकप सहित दूसरी घटनाओं को देखते हुए लगभग सभी बड़े अस्पतालों में 10 से 70 तक बिस्तर आरक्षित किए गए हैं। इन बिस्तर को अस्पतालों में आपदा प्रबंधन बिस्तर कहते हैं। इन बिस्तर को बनाते समय उपलब्ध जनशक्ति और बुनियादी ढांचे का विशेष ध्यान रखा जाता है। इनमें पर्याप्त कर्मचारियों, संस्थागत संसाधनों और संरचनाओं को नियुक्त किया जाता है। रोजाना इन बिस्तरों की जांच होती है।
सायरन सुनकर घबराने की जरूरत नहीं
सेंट्रल दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट जी सुधाकर ने कहा कि यह परीक्षण नियमित तैयारियों का हिस्सा है। उन्होंने लोगों से शांत रहने और सायरन सुनकर घबराने के बजाय इसे सामान्य प्रक्रिया समझने की अपील की। जिला प्रशासन ने सोशल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए इस परीक्षण के बारे में व्यापक प्रचार करने के निर्देश दिए हैं ताकि लोगों में भ्रम की स्थिति न हो।
एयर लिफ्ट कर ला सकते हैं मरीज
सीमावर्ती क्षेत्रों में हो रही गोलाबारी में यदि कोई गंभीर रूप से घायल होता है और उसे एडवांस चिकित्सा सुविधा की जरूरत होती है तो उसे एयरलिफ्ट करके लाया जा सकता है। एम्स ट्रामा सेंटर में ऐसे मरीज आते है।
आपदा प्रबंधन बिस्तर पर हर सुविधा
लोकनायक अस्पताल में इमरजेंसी विभाग के डॉक्टरों कहना है कि आपदा से निपटने के लिए अस्पताल में 70 बिस्तर की व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि अस्पताल ऐसे किसी भी हादसे में घायल मरीज को हर संभव इलाज देने के लिए बनाया गया है।