दिल्ली पुलिस के जवान की कोरोना वायरस से मौत होने और रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जहां राजधानी के अस्पतालों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, वहीं संक्रमण की रफ्तार को लेकर भी चिंता बढ़ रही है।
मौत से एक दिन पहले तक उक्त जवान में कोरोना के कोई लक्षण नहीं थे। इसे लेकर विशेषज्ञों की अलग-अलग सलाह सामने आ रही है।
दिल्ली एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर बताते हैं कि वायरल लोड (संक्रमण का भार) बढ़ने से ऐसी स्थिति हो सकती है। वायरल लोड का मतलब एक ऐसी चीज जो संक्रमित है और संबंधित व्यक्ति बार-बार उसके संपर्क में आ रहा है। यह इंसान भी हो सकता है।
इस तरह एक ही व्यक्ति बार-बार संक्रमित होता रहता है और उसके शरीर में विषाणुओं की संख्या तेजी से बढ़ती है, जिसके चलते अचानक उसे सांस लेने में रुकावट या हार्टअटैक जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
नई दिल्ली स्थित आरएमएल अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति में संक्रमण के लक्षण नहीं मिल रहे हैं और वह लगातार अपना काम (जैसे ऑफिस जाना या ड्यूटी देना) कर रहा है तो इसका मतलब है कि उस जगह पर वह बार-बार संक्रमण के संपर्क में आ रहा है।
एक अन्य डॉक्टर बताते हैं कि कोरोना वायरस पहले से किसी बीमारी ग्रस्त रोगी या फिर बुजुर्ग लोगों के लिए घातक है, लेकिन देश में कम उम्र वाले लोगों की मौतें भी हो रही हैं।
कोरोना की तीसरी स्टेज मिलने पर संबंधित मरीज को आईसीयू में भर्ती किया जा सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पहली या दूसरी स्टेज में मिलने वाला मरीज तीसरी स्टेज तक नहीं पहुंच सकता।
हालांकि, दिल्ली पुलिस के जवान की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो चुकी थी। ऐसे में डॉक्टरों को भी इस केस के बारे में बहुत ज्यादा अनुभव नहीं होने के कारण सटीक जानकारी मिल पाना मुश्किलों भरा है।