अक्षरधाम मंदिर के पास रविवार शाम चलती कार में आग लगने से मां और दो बेटियों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के समय कार सीएनजी से चल रही थी। ऐसे में ज्यादातर लोगों का मानना है कि आग सीएनजी लीक होने की वजह से लगी है, लेकिन विशेषज्ञों की राय इससे अलग है। उनका कहना है कि सीएनजी विस्फोटक गैस नहीं है। दिल्ली-एनसीआर में लाखों की तादाद में सीएनजी चलति गाड़ियां सड़कों पर दौड़ रही हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में आग उसी कार में लगती है, जिसमें गलत तरीके से वायरिंग की होती है या सर्विस का ध्यान नहीं रखा गया होता। कुछ बातों का ख्याल रखकर ऐसे हादसों को टाला जा सकता है।
ऑटो एक्सपर्ट अब्दुल वाहिद ने बताया कि शॉर्ट सर्किट से आग लगने की वजह यह है कि आजकल लोग कार में बैटरी की क्षमता से ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगवा लेते हैं। छह-छह स्पीकरों के साथ म्यूजिक सिस्टम, जगह-जगह एक्सट्रा लाइटें लगाने के कारण बैटरी पर लोड बढ़ जाता है। वहीं इन सब चीजों को लगवाने के लिए अतिरिक्त वायरिंग करवानी पड़ती है। फिटिंग किसी अनाड़ी मैकेनिक से कराई है तो वह जुगाड़ करके तार जोड़ देता है। बाद में यही तार आग लगने की वजह बनते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सीएनजी वाली कार में आग तो लग सकती है, लेकिन उसकी वजह सीएनजी नहीं होती।
खराब वायरिंग के अलावा अनाड़ी लोगों से गाड़ी की सर्विस कराना आग लगने का बड़ा कारण है। आग लगने की सूरत में पेट्रोल तो जरूर आग भड़काने का काम करता है लेकिन सीएनजी का इसमें कोई रोल नहीं होता। विशेषज्ञों का कहना है कि सब गाड़ियों में सीएनजी नही लग पाती है, लेकिन लोग जबरदस्ती लोकल सीएनजी किट लगवा लेते हैं। सीएनजी किट लगाने वाले एक मैकेनिक ने बताया कि डटसन गो कार में सीएनजी सही काम नहीं करती है। शायद यह एक वजह है कि इस कार में आग लगी।
चालक को एकदम नहीं चलता आग लगने का पता...
कार में जब आग लगती है तो एक दम से लपटें नहीं उठने लगतीं बल्कि धीरे-धीरे आग फैलती है। पहले थोड़ा धुआं निकलता है, जिसका ड्राइवर को पता नहीं चलता। आमतौर पर देखा गया है कि जब किसी की कार में से धुआं निकल रहा होता है तो ड्राइवर को पता नहीं चल पाता। राहगीर या दूसरे लोग उसे बताते हैं कि कार में आग लग गई है।
आग लगने का जल्दी पता नहीं चल पाए तो कार देखते ही देखते लपटों में घिर जाती है। आग लगते ही कार का ऑटोमैटिक सिस्टम काम करना बंद कर देता है और उसमें बैठे लोग फंस जाते हैं। अक्षरधाम मामले में भी आशंका व्यक्त की जा रही है कि ऑटोमैटिक सेंट्रल लॉक सिस्टम लॉक होने की वजह से मां और बेटियां कार से उतर नहीं पाई और हादसे का शिकार हो गई।
ऐसे करें बचाव...
-आग से बचाव के लिए कार की सर्विस समय पर कराएं।
-सर्विस अधिकृत सर्विस स्टेशन पर या ट्रेंड मैकेनिक से ही कराएं।
-कार में जरूरत से ज्यादा ऐसेसरीज न लगवाएं। ध्यान रखें कि बैटरी पर जरूरत से ज्यादा लोड न पड़े।
-कार को समय-समय पर खुद भी चेक करते रहें, कहीं कोई तार कटा हो या पाइप गला तो उसे तुरंत बदलवाएं।
-कार में आग बुझाने के लिए आग बुझाने वाला सिलिंडर जरूर होना चाहिए।
-कार में सीएनजी किट हमेशा अधिकृत डीलर से ही लगवाएं। समय-समय पर उसकी जांच भी करवाते रहें।
-सीएनजी लगवाने की सूरत में वायरिंग अच्छी क्वालिटी की लगवाएं और वायरिंग कवर होनी चाहिए।
आग लग जाए तो क्या करें...
-आग लगने पर घबराएं नही, सबसे पहले कार का इंजन बंद करने का प्रयास करें। ऐसा करने से तेल की सप्लाई बंद हो जाती है और आग भड़कने का खतरा कम हो जाता है।
-धुंआ या आग की गंध आने पर तुरंत कार रोककर कार से बाहर निकल जाएं।
- सेंट्रल लॉक की वजह से कार के दरवाजे जाम हो गए हों तो खुद ही अंदर से कार के दरवाजे खोलने का प्रयास करें।
- कार में कोई हथौड़ा या भारी वस्तु रखेें, जिससे कार के दरवाजे जाम होने की सूरत में शीशों को तोड़ा जा सके।
- किसी वजह से कार के शीशे नही टूटे तो आगे वाले शीशे पर सीट पर बैठे-बैठे पैर से जोर लगाएं, ऐसा करने से शीशा बाहर निकल जाता है।
- कार से बाहर निकलने के बाद आसपास मिट्टी या बालू से आग बुझाने का प्रयास करें।
कार में आग लगने की घटनाएं
-26 जनवरी 2012: दिलशाद गार्डन में एक कार में लगी आग, महिला और दो बच्चों की झुलसकर मौत।
-5 जून 2014 : बिजवासन इलाके में कार में लगी आग, दो भाइयों की झुलसकर मौत।
-9 फरवरी 2017: नंदनगरी इलाके में चलती कार में लगी आग, ड्राइवर की झुलसकर मौत।
-24 मार्च 2017 : बुध विहार में पार्किंग में खड़ी कार में लगी आग, कार में खेल रही दो बच्चियां झुलसी।
-11 अगस्त 2018: दिल्ली के शेख सराय इलाके में बीच सड़क पर कार में लगी आग, चालक की झुलसकर मौत।
-24 फरवरी 2019: आनंद विहार के पास ईको स्पोर्ट कार और ओमनी वैन में टक्कर के बाद लगी आग, तीन लोगों की झुलसने से मौत।