सम-विषम योजना की आड़ में ऐप आधारित कैब कंपनियां ओला व उबर आम लोगों से अधिक किराया ही नहीं वसूल रहीं, बल्कि उनका गैरकानूनी रूप से संचालन भी हो रहा है। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने स्वयं संज्ञान लेकर कैब कंपनियों को कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग ने हाईकोर्ट को उक्त जानकारी देते हुए कहा कि विभाग ऐसी कैब कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। परिवहन विभाग उपायुक्त (टैक्सी यूनिट) सुरेश चंद मीणा ने न्यायमूर्ति जेआर मिड्ढा के समक्ष पेश अपने जवाब में कहा है कि 28 जून, 2015 को विभाग ने कैब कंपनियों के लाइसेंस संबंधी आवेदन को खारिज कर दिया था।
कंपनियों को सिटी टैक्सी स्कीम-2015 के तहत किए गए प्रावधान के तहत लाइसेंस लेने को कहा गया था और आज तक किसी भी कंपनी ने लाइसेंस के लिए आवेदन दायर नहीं किया, यानी वे बिना लाइसेंस के ही अवैध तरीके से ही चल रही हैं।
सम-विषम की आड़ में वसूला जा रहा ज्यादा किराया
उन्होंने कहा कि व्यवसाय के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य है। नई स्कीम के तहत पीक टाइम या बिजी टाइम के नाम से यात्रियों से अधिक किराया वसूलने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में विभाग को शिकायत मिली है कि कैब कंपनियां सम-विषम योजना की आड़ में टैक्सियों की डिमांड बढ़ने पर ज्यादा किराया वसूल रही हैं।
इस पर रोक लगाने के लिए विभाग ने एक हेल्पलाइन शुरू की है, जिसमें यात्री ओवर चार्जिंग की शिकायत कर सकते है। शिकायत मिलने पर कैब कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के अलावा परमिट रद्द और वाहन जब्त की चेतावनी दी गई है।
उन्होंने कहा कि यात्री को टैक्सी का नंबर व बिल देना होगा। अब तक विभाग ने 119 कैब के खिलाफ कार्रवाई की है। उपायुक्त ने कहा कि मुख्यमंत्री ने भी आम लोगों को होने वाली परेशानी पर संज्ञान लेकर परमिट रद्द और वाहन जब्त करने की चेतावनी दी है।
40 से 50 रुपये प्रति किलोमीटर किराया
सम-विषम का सूरत-ए-हाल
- फोटो : विवेक निगम/अमर उजाला, नई दिल्ली
उन्होंने विभाग की सतर्कता शाखा कार्रवाई कर रही है और यातायात पुलिस से भी नियमों का उल्लंघन करने वाली कैब के खिलाफ कार्रवाई का आग्रह किया गया है। इसके अलावा कैब पर अंकुश लगाने के लिए दिशा निर्देश तय किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कैब कंपनियां लाइसेंस लेने में देरी करके कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन कर रही हैं, जबकि वह स्कीम का पालन करने के लिए बाध्य हैं। ऐसे में कैब कंपनियों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई के ध्यानार्थ याचिका खारिज की जाए।
याचिका मैजिक सेवा प्राइवेट लिमिटेड ने दायर की है। याची ने ओला, उबर व अन्य ऐप आधारित कैब कंपनियों पर आरोप लगाया कि वह सरकार द्वारा तय 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर किराये की बजाय लोगों से सम विषम योजना के बहाने 40 से 50 रुपये प्रति किलोमीटर किराया वसूल रही हैं।