केंद्र ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में कहा कि दिल्ली में विधानसभा चुनाव इतनी जल्दी कराना जनता के हित में नहीं है।
राष्ट्रपति शासन के खिलाफ आप की याचिका ने केंद्र से जवाब तलब किया था। उसी का जवाब देते हुए केंद्र ने दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की पैरवी की।
अरविंद केजरीवाल के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद उप राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की थी, जिसे केंद्र ने मान लिया था। जबकि आप पार्टी का कहना है कि दिल्ली कैबिनेट ने दिल्ली विधानसभा भंग कर जल्दी चुनाव कराने की सिफारिश की थी। जिसे मानने के लिए उप राज्यपाल बाध्य थे लेकिन इसके बावजूद उन्होंने ऐसा नहीं किया।
इसके बाद आम आदमी पार्टी अपनी इसी सिफारिश को आधार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट गई थी।