यूं बिगड़ी बात
दरअसल करीब दो महीने बाद भाजपा और अपना दल के रिश्ते तब तल्ख हुए जब राज्य के एक मेडिकल कॉलेज के उद्घाटन कार्यक्रम में राज्य सरकार ने केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे को तो बुलाया मगर अनुप्रिया को नहीं। अपना दल का कहना था कि विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ऐसे सभी कार्यक्रमों में अनुप्रिया को बुलाती रही थी, मगर सत्ता में आने के बाद उनकी लगातार उपेक्षा की जाती रही।
अपना दल के सूत्रों का कहना है कि मिर्जापुर भाजपा के जिला अध्यक्ष राज्य नेतृत्व से जुड़े वरिष्ठ नेताओं के इशारे पर पार्टी कार्यकर्ताओं को अपना दल से जुड़े कार्यक्रों में शिरकत करने पर पार्टी से निकालने की धमकी दे रहे हैं। केंद्रीय नेतृत्व को इस बारे में सबूतों के साथ अवगत कराने पर भी इसका संज्ञान नहीं लिया गया। इससे अपना दल को अंदेशा है कि साथ चुनाव लड़ने पर भी राज्य भाजपा नेतृत्व अनुप्रिया को चुनाव हरवा सकती है। इसके बाद पिछड़ा वर्ग आयोग में नियुक्तियों में अनदेखी जैसी कई शिकायतें अपना दल ने की।
हमारी नहीं सुनी इसलिए अब हम स्वतंत्र
अध्यक्ष आशीष पटेल ने इस मुलाकात पर टिप्पणी करने से इंकार किया। हालांकि उन्होंने कहा कि गठबंधन धर्म को ईमानदारी से निभाने के बावजूद हमारी एक नहीं सुनी गई। हमें सम्मान तक के लायक नहीं समझा गया। अब हम भावी निर्णय के लिए स्वंतत्र हैं। हमने 28 फरवरी को बड़ी बैठक बुलाई है। सबसे विचार विमर्श के बाद हम निर्णय लेंगे।
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि बीजेपी के साथ हमें कुछ समस्याएं आईं और उसको हमने शीर्ष नेतृत्व के सामने रखा भी। 20 फरवरी तक का हमने उन्हें समय दिया कि इन समस्याओं का समाधान करें, लेकिन इन समस्याओं का समाधान नहीं किया। इससे यही प्रतीत होता है कि बीजेपी को शिकायतों से कोई लेना देना नहीं है। समस्याओं के समाधान में कोई रूचि नहीं है। इसलिए अपना दल अब स्वतंत्र है, अपना रास्ता चुनने के लिए। हमारी पार्टी की बैठक हमने बुला ली है। पार्टी जो तय करेगी हम करेंगी।