स्याना बवाल प्रकरण में केस डायरी और चार्जशीट सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। प्री मेडिकल रिपोर्ट में इंस्पेक्टर की हेड इंजरी का जिक्र संबंधित चिकित्सक द्वारा किया गया, लेकिन गोली से चोट लगने की बात इंगित नहीं है।
दूसरी ओर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इंस्पेक्टर को गोली लगने की बात है। कानून के जानकारों की मानें तो एसआईटी की विवेचना आरोपियों को फायदा पहुंचा सकती है।
पिछले दिनों एसआईटी ने केस डायरी व चार्जशीट कोर्ट में पेश की थी, जिसमें कई सवाल पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे हैं। पहला सवाल तो इंस्पेक्टर को सीएचसी ले जाने वाले समय को लेकर है।
सरा सबसे बड़ा सवाल इंस्पेक्टर की प्री मेडिकल रिपोर्ट है, इसमें साफ है कि पुलिसकर्मी तीन दिसंबर की दोपहर एक बजे घायल इंस्पेक्टर सुबोध को लेकर सीएचसी लखावटी पहुंचे थे। रिपोर्ट में इंस्पेक्टर की मौत घोषित करने का समय दो बजे अंकित है। प्री मेडिकल रिपोर्ट में इंस्पेक्टर के सिर पर चोटों के निशान का जिक्र है, लेकिन गोली लगने का जिक्र नहीं है।
हेड चालक राम आसरे द्वारा शव को प्राप्त करने का जिक्र है। उधर, तीन दिसंबर की रात जिला अस्पताल में हुए इंस्पेक्टर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके आंख के पास गोली से चोट की बात की गई है। संबंधित डॉक्टर मामले में बयान देने से मना कर रहे हैं।