प्रद्युम्न हत्याकांड में सीबीआई अब आरोपी छात्र की ब्रेन मैपिंग या साइकोमैट्रिक टेस्ट कराना चाहती है। ताकि उसकी मनोस्थिति स्पष्ट हो सके। इसके लिए सीबीआई जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड से मांग करेगी।
सीबीआई सूत्रों का कहना है कि अभी तक की जांच में सामने आया है कि परीक्षा और पैरेंट्स टीचर मीटिंग टालने के मकसद से आरोपी छात्र ने प्रद्युम्न की हत्या कर दी। इस बात को और पुख्ता करने के लिए सीबीआई उसकी मनोदशा समझना चाहती है।
सीबीआई ने इस मामले में स्कूल के ही 11वीं कक्षा के विद्यार्थी को काबू किया था। फिलहाल जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने आरोपी छात्र को 22 नवंबर तक फरीदाबाद स्थित बाल सुधार गृह भेज दिया है।
अब इन तथ्यों पर सोच पही सीबीआई
प्रद्युम्न की हत्या कांड के आरोपी को फरीदाबाद बाल सुधार गृह में लाया गया ।
- फोटो : अमर उजाला
अब सीबीआई इस मामले में दूसरे छात्र की भूमिका और चार पुलिसकर्मियों द्वारा साक्ष्य से छेड़छाड़ करने व कंडक्टर को आरोपी बनाने की भूमिका को लेकर जांच कर रही है। मामला गंभीर होने के कारण सीबीआई भी फूंक-फूंककर कदम रख रही है।
आरोपी छात्र के नाबालिग होने के कारण सीबीआई अपने सभी तथ्यों की पुष्टि करते हुए बोर्ड के सामने पेश करना चाहती है। सीबीआई 22 नवंबर के बाद एक बार फिर आरोपी छात्र को हिरासत में लेकर दूसरे छात्र की भूमिका की जांच के साथ ही आरोपी का साइकोमैट्रिक या ब्रेन मैपिंग टेस्ट करवाना चाहती है।
सूत्रों की मुताबिक सीबीआई दोनों टेस्ट की मांग करेगी। कम से कम एक टेस्ट की अनुमति के लिए पैरवी की जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है आमतौर पर सीबीआई अपराधियों की मनोदशा और स्थिति समझने के लिए इस तरह का टेस्ट कराती है।
क्या है ब्रेन मैपिंग
ryan international
- फोटो : सुदर्शन झा
इसमें मस्तिष्क में उठने वाली विभिन्न आवृत्तियों की तरंगों का अध्ययन किया जाता है। परीक्षण में अपराध शाखा के विशेषज्ञ तंत्रिका विज्ञान की विभिन्न तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं। अपराध के दृश्यों को पहचानने वाले संदिग्ध के मस्तिष्क की तरंगों में जो परिवर्तन देखे जाते हैं वे निर्दोष व्यक्ति के मस्तिष्क की तरंगों से अलग होते हैं।
ब्रेन-मैपिंग में व्यक्ति के सिर से सेंसर्स को जोड़ दिया जाता है और उसे एक कंप्यूटर के सामने बिठा दिया जाता है। इसके बाद संदिग्ध को अपराध से जुड़ी तस्वीरें दिखाई जाती हैं या उससे जुड़ी ध्वनियां सुनाई जाती हैं। सिर से जुड़े सेंसर तस्वीरों को देखते समय या ध्वनियां सुनते समय मस्तिष्क में उठने वाली तरंगों को दर्ज कर लेते हैं।