सफर(सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च) के आंकड़े बताते हैं कि पीएम 2.5 का स्तर 210 दर्ज किया गया। पीएम10 का स्तर 334 रहा। दिल्ली के चार इलाकों में हवा गंभीर स्तर की खराब और 29 इलाकों में बेहद खराब दर्ज की गई। सफर के विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली में प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह स्थानीय है।
तापमान और हवा की गति कम होने से मौसम के हालात खराब हैं। इससे प्रदूषण छंट नहीं रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के कारण दिल्ली और आसपास के इलाकों में नमी बढ़ी है। दिवाली तक हालात में सुधार की ज्यादा गुंजाइश नहीं बन रही है।
घर से काम करने की मिले इजाजत
दिल्ली के नागरिकों के समूह माइ राइट टू ब्रीद ने ईपीसीए को पत्र लिखकर प्रदूषण से निपटने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने की मांग की है। समूह का कहना है कि रोज ऑफिस जाने वाले लोगों को ग्रैप लागू रहने के दौरान घर से काम करने की इजाजत दी जाए। इससे सड़कों पर वाहन कम होंगे। इसका सीधा और सकारात्मक असर वायु की गुणवत्ता पर पड़ेगा। इसके अलावा, दिल्ली-एनसीआर की हर इंडस्ट्री का उत्सर्जन स्तर ऑनलाइन किया जाए। इससे पता चल सकेगा कि किस फैक्ट्री से कितना प्रदूषण हो रहा है।
आनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लांच
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने डीपीसीसी के लिए शुक्रवार को ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लांच किया। इससे दल्ली में किसी भी तरह की इंडस्ट्री लगाने के लिए आवेदन ऑनलाइन भरा जा सकता है। इसके अलावा दूसरी जरूरी औपचारिकताएं भी इससे पूरी होंगी।
औद्योगिक नगरी शुक्रवार को भी देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में दूसरे स्थान पर रही। शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक शुक्रवार को भी 409 के बेहद खतरनाक स्तर पर रहा। प्रदूषण नियंत्रण के प्रशासनिक प्रयास के बावजूद हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो रहा है, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारियों के मुताबिक, दिवाली के बाद प्रदूषण का स्तर और भी बढ़ेगा। 422 वायु गुणवत्ता सूचकांक के साथ कानपुर देश का सर्वाधिक प्रदूषित शहर रहा।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विजय चौधरी ने बताया कि मौसम में बदलाव और तापमान गिरने से वायुमंडल में प्रदूषकों का घनत्व बढ़ रहा है। रात के समय तापमान कम होता है जिससे हवा और उसमें पाए जाने वाले प्रदूषक संघनित हो जाते हैं, यही कारण है कि इस समय पीएम 2.5 की मात्रा वातावरण में सर्वाधिक दर्ज की जाती है। शुक्रवार को रात 12 बजे से सुबह छह बजे तक पीएम 2.5 की मात्रा 470 से 422 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के बीच बनी रही। सुबह आठ बजे यह घटकर 399 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पहुंचा, लेकिन उसके बाद इसकी मात्रा में फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई।
शाम तक इसकी मात्रा में कमी आई लेकिन पीएम 2.5 पूरे दिन में 305 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से कम नहीं हुआ। प्रदूषक नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड भी सामान्य 80 की जगह 180 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के स्तर पर रहा। विजय चौधरी के अनुसार, सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) का अनुमान है कि अगले तीन दिन तक दिल्ली एनसीआर का वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद खराब रह सकता है। इसके कारण मौसम में तब्दीली है, पछुआ हवा के कारण चार नवंबर तक शहर के वायुमंडल में नमी बढ़ेगी, इससे वायुमंडल की प्रदूषक ढोने की क्षमता बढ़ जाएगी। स्थानीय हवाएं भी शांत हैं जिस कारण प्रदूषण कम नहीं हो रहा।
उन्होंने बताया कि प्रशासनिक साइटों पर निर्माण कार्य रुकवा दिये गए हैं। निजी निर्माण रुकवाने के लिए नगर निगम, हुडा, एनएचएआई आदि सरकारी विभागों को निर्देश जारी किए गए हैं। परिवहन विभाग और यातायात पुलिस को भी निर्देश दिए गए हैं कि एक से दस नवंबर तक सघन चेकिंग कर प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर लगाम लगाई जाए। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की है कि अपने आस पास कूड़े के ढेर में आग नहीं लगने दें, यदि आग लगाई जाती है तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित विभाग को दें।
दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बेहद गंभीर है, जिसके कारण लोग बाहर न निकलकर घर बैठना सुरक्षित समझ रहे हैं, लेकिन घर बैठना बाहर निकलने से भी ज्यादा खतरनाक है क्योंकि जैसे-जैसे आउटडोर (घर के बाहर) प्रदूषण बढ़ रहा है, वैसे ही इंडोर (घर के अंदर) प्रदूषण भी गंभीर स्तर पर पहुंच रहा है।
नतीजतन यदि घर में वेंटिलेशन नहीं है तो घर बैठकर लोगों को बाहर निकलने से ज्यादा नुकसान हो रहा है। घर में औसतन प्रदूषण का लेवल एक हजार तक सामान्य माना जाता है, लेकिन दिल्ली की इस स्थिति के चलते जिस घर में वेंटिलेशन नहीं है, उस घर में प्रदूषण का स्तर तीन से चार हजार तक पहुंच रहा है, जो कि बेहद खतरनाक है।
डॉक्टरों के मुताबिक जो नए घर बनाए जा रहे हैं उनमें वेंटिलेशन का ध्यान रखा जा रहा है, लेकिन जो पुराने घर बने हैं या जो छोटे घर बने हुए हैं, वहां वेंटिलेशन की कोई व्यवस्था नहीं है। साथ ही स्लम में बने घरों में हालात और भी खराब हैं। जैसे-जैसे कमरे में सदस्य बढ़ते रहते हैं, वैसे-वैसे इंडोर प्रदूषण भी बढ़ता है क्योंकि जब वह कार्बन डाइऑक्साइड रिलीज करते हैं तो वेंटिलेशन न होने की वजह से वह गैस कमरे में ही घूमती रहती है। इसके चलते कार्बन डाइऑक्साइड ही छोड़ते हैं, उसे सांस लेते समय उसे ही वापिस अंदर ले लेते हैं, जिससे बीमारियों का खतरा और भी बढ़ जाता है।
इस बारे में डॉ. केके अग्रवाल बताते हैं कि इंडोर प्रदूषण चेक करने के लिए कई तरह की तकनीक आ गई हैं, जिससे इसे चेक किया जा सकता है। सामान्य इंडोर प्रदूषण का लेवल एक हजार है, लेकिन इन दिनों यह बेहद बढ़ा हुआ है। जिन लोगों को कुछ बीमारियां हैं या खासतौर पर अस्थमा के शिकार हैं, उनके लिए खतरा और बढ़ जाता है।
इंडोर प्रदूषण से पहले खांसी, गला दर्द, आंखों में परेशानी जैसी समस्याएं होती हैं, लेकिन यदि इसे नजरअंदाज किया जाता है तो इससे हार्ट रोग और कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी भी जन्म ले सकती हैं। इसके साथ ही घर में शोर प्रदूषण भी काफी रहता है। इसका सामान्य लेवल 45 होता है, लेकिन आमतौर पर यह घरों में ज्यादा ही देखा जाता है। इसका परिणाम यह होता है कि पढ़ाई के साथ किसी भी काम में मन नहीं लगता।