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यूपी के इस गांव में टूटी 1100 साल पुरानी परंपरा, दो बहनों की शादी बनी गवाह

Thu, 17 Nov 2016 01:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लोनी
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wedding - फोटो : अमर उजाला
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कसाना-बैसला गोत्र के बीच 1100 वर्षों से चली आ रही अंतरगोत्रीय विवाह न करने की परंपरा बुधवार को टूट गई। बुधवार को लोनी के रिस्तल गांव निवासी कसाना गोत्र के दो युवकों का विवाह घिटौरा बागपत निवासी बैसला गोत्र की युवतियों से हुआ।
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एक और खास बात यह रही कि दोनों शादियां बिना दहेज के हुईं। बता दें कि अंतरगोत्रीय विवाह को लेकर 12 जून 2016 को चिरौड़ी गांव स्थित इंटर कॉलेज में गुर्जर समाज के 24 गांवों की महापंचायत बुलाई गई थी।

पंचायत में एक ही गोत्र (कसाना और बैसला) में विवाह पर रोक की 1100 साल पुरानी इस परंपरा को खत्म करने पर सर्वसम्मति से सहमति बनी थी।
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wedding - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद पंचायत के दौरान ही बागपत के घिटौरा गांव निवासी करतार सिंह ने अपनी पोतियों अंजू और मंजू की शादी लोनी रिस्तल गांव निवासी विजय कसाना के बेटों अर्जुन और अदित्य से तय कर दी थी।

इसके साथ ही दहेज न लेने और शादी में फिजूलखर्ची नहीं करने की बात तय की गई थी। बुधवार को रिस्तल गांव निवासी कसाना गोत्र के दोनों युवकों की बारात घिटौरा बागपत निवासी बैसला परिवार में पहुंची।

रीति रिवाज के साथ विवाह संपन्न हुआ और शाम को सभी बाराती रिस्तल लौट आए। शादी में बागपत के जिला पंचायत अध्यक्ष योगेश धामा, राज्यमंत्री रामकिशोर अग्रवाल ने भी शिरकत की।
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