डेंगू से पीड़ित सात वर्षीय आद्या की मौत और मोटी फीस वसूलने के मामले में हरियाणा सरकार की सिफारिश के आधार पर सेक्टर-44 स्थित फोर्टिस अस्पताल के खिलाफ सुशांत लोक थाना पुलिस ने शनिवार देर रात मामला दर्ज कर लिया है।
यह मामला सिविल सर्जन द्वारा की गई शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के आधार पर किया गया है। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक की सिफारिश पर अस्पताल के डॉक्टर के बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर विकास वर्मा को मुख्य रूप से आरोपी बनाया गया है।
अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज नहीं होने पर आद्या के पिता जयंत सिंह ने सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार की रिपोर्ट में भी माना गया हैै कि गलत तरीके से इलाज के एवज में अस्पताल में मोटी फीस वसूलने की बात सामने आई है।
इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया गया। जयंत का कहना है कि सोमवार को वह जांच अधिकारी से मिलेंगे, यदि अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज नहीं होता है तो वह कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
adya singh
- फोटो : अमर उजाला
थाना प्रभारी इंस्पेक्टर गौरव फोगाट का कहना है कि जांच में सिविल सर्जन, आद्या के पिता और सरकारी रिपोर्ट में दर्ज अस्पताल के डॉक्टर को भी जांच में शामिल किया जाएगा। बता दें कि द्वारका निवासी सात वर्षीय आद्या को डेंगू होने के बाद सेक्टर-44 स्थित फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
31 अगस्त से 14 सितंबर तक अस्पताल में इलाज चला था। 14 सितंबर को अस्पताल की ओर मेडिकल एडवाइज के नाम पर छुट्टी दे दी और 14 सितंबर की देर रात आद्या ने दम तोड़ दिया था। फोर्टिस अस्पताल की ओर से परिजनों को 15.76 लाख रुपये का बिल थमा दिया गया था।
आद्या के पिता जयंत के दोस्त ने ट्विटर के जरिये केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को इस बारे में कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद हरियाणा स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने इस मामले की जांच के लिए अतिरिक्त महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ राजीव बडेरा के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित की थी। जांच के दौरान टीम ने पाया कि अस्पताल ने इलाज में खामियां बरती हैं।
बच्ची को बाल आईसीयू में दाखिल करवाने के बाद अस्पताल ने न केवल डायग्नोज प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया बल्कि आईएमए के नियमों की भी अनदेखी की गई। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में प्रत्येक खामी का उल्लेख किया है।
रिपोर्ट में मिली थीं यह खामियां
Gurugram Fortis hospital
- फोटो : File Photo
टीम ने जांच के दौरान पाया कि अस्पताल द्वारा आद्या को चढ़ाए गए प्लेटलेट्स की कीमत काफी अधिक वसूली गई है। जांच रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्री को सौंपी गई, जिसके बाद उन्होंने इस मामले में एफआईआर दर्ज करवाने के आदेश महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं को दिए। उन्होंने ही सिविल सर्जन के माध्यम से सुशांत लोक थाने में मामला दर्ज कराया है।
सुशांत लोक थाना प्रभारी इंस्पेक्टर गौरव फोगाट ने बताया कि मामले की जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है। इसमें स्वास्थ्य विभाग की ओर से फोर्टिस अस्पताल के खिलाफ धारा 304 पार्ट-2 के तहत मामला दर्ज करने की सिफारिश की गई है। इस पर मामला दर्ज कर लिया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई जांच रिपोर्ट की स्टडी की जा रही है। इसमें संबंधित लोगों को जांच में शामिल किया जाएगा।
17 बार तो 400-400 रुपये के प्लेटलेट्स चढ़ाए गए, जबकि इन्हीं प्लेटलेट्स के दाम अस्पताल में 8 बार 2 हजार रुपये प्रति यूनिट की दर से वसूले गए। अस्पताल में जेनेरिक दवाएं उपलब्ध होने के बाद भी ब्रांडेड दवाएं दी गईं।
दवाओं में अस्पताल ने 108 फीसदी का मुनाफा कमाया। 302244 रुपये की दवाओं के लिए अस्पताल ने 670126 रुपये वसूले। न्यूरोपेनुम इंजेक्शन जेनेरिक में 499 रुपये और अन्य ब्रांड के 3112 रुपये में मौजूद थे। अस्पताल में जेनेरिक इंजेक्शन मौजूद होने के बावजूद ब्रांडेड इंजेक्शन लगाए गए।