दिल्ली विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया है कि दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसबी) में मध्यप्रदेश के व्यापम जैसा ही घोटाला हुआ है।
यहां पैसे लेकर अयोग्य उम्मीदवारों के चयन और प्रतिभावान उम्मीदवारों को जानबूझकर फेल करने का घोटाला हुआ है, इसलिए दोषियों को सजा मिलनी जरूरी है।
इसकी भ्रष्टाचार निरोधक शाखा से जांच होनी चाहिए। इस मामले को लेकर विजेंद्र गुप्ता ने अपने साथी दोनों विधायकों व पीड़ित उम्मीदवारों के साथ उपराज्यपाल नजीब जंग से मुलाकात की।
घोटाले से संबंधित सुबूत और दस्तावेज उपराज्यपाल को सौंपे गए
विजेंद्र गुप्ता ने उपराज्यपाल को भ्रष्टाचार और घोटाले से संबंधित आवश्यक दस्तावेज दिए। इसके अलावा परीक्षा में घोटाले से संबंधित अनेक सुबूत और दस्तावेज उपराज्यपाल को सौंपे गए।
विजेंद्र गुप्ता के अनुसार, उपराज्यपाल ने सभी कागजात को देखते हुए माना कि निरीक्षकों, सहायकों, हेड क्लर्क, ग्रेड-2 (दास कैडर) परीक्षा (पद कोड 90/09) में धांधली हुई है। इस कारण उन्होंने मामले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक शाखा से कराने का निर्णय किया।
उन्होंने बताया कि इस परीक्षा में जिन उम्मीदवारों से बोर्ड के भ्रष्ट अधिकारियों व कर्मचारियों को रिश्वत की अग्रिम धन की प्राप्ति हो गई थी, उनको जान-बूझकर शकरपुर केंद्र में परीक्षा देने के लिए स्थानांतरित कर दिया गया था, ताकि वे खुलकर नकल कर सकें, क्योंकि शकरपुर केंद्र में जैमर नहीं लगे थे।
नकल करने के लिए एक साथ बिठाया गया था
यहां एक ही कक्ष में 41 उम्मीदवारों को नकल करने के लिए एक साथ बिठाया गया था। परिणामस्वरूप शकरपुर केंद्र के उम्मीदवारों ने परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त किए।
उन्होंने बताया कि इस धांधली की लिखित शिकायत परीक्षा में अनुत्तीर्ण किए गए योग्य उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से की थी।
उपमुख्यमंत्री ने जांच के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की थी। इस समिति ने जांच के बाद धांधली और भ्रष्टाचार की शिकायत को सत्य माना और सरकार से सिफारिश की कि पूरी परीक्षा रद्द करके फिर से परीक्षा कराई जाए। सरकार ने परीक्षा रद्द नहीं की और अब उसी परिणामों के आधार पर अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति करने जा रही है।