कोरोना वायरस की इस महामारी के बाद दुनिया में एक मजबूत जैवसुरक्षा फ्रेमवर्क तैयार करने की जरूरत है। जोकि सार्वजनिक-स्वास्थ्य हस्तक्षेपों की पूरी श्रृंखला को कवर करेगा। साथ ही वैज्ञानिक अनुसंधान, नीति निर्माण, कार्यान्वयन, मूल्यांकन और जैव आपदा से मजबूती से निपटने की क्षमता में भी इजाफा होगा। ये कहना है नई दिल्ली स्थित विकासशील देशों के लिए अनुसंधान और सूचना प्रणाली (आरआईएस) के महानिदेशक डॉ सचिन चतुर्वेदी का।
मंगलवार को डॉ चतुर्वेदी ने कहा कि दुनिया में जिस प्रकार से कोविड-19 महामारी का प्रसार हुआ है और इसे लेकर कई रहस्य भी अभी बरकरार हैं। इसके चलते एक प्रभावी जैव सुरक्षा का फ्रेमवर्क तैयार करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जैविक युद्ध के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बायोसाइंस विशेषज्ञता और ज्ञान नेटवर्क को तत्काल विकसित करना चाहिए। विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार इसके महत्वपूर्ण घटक होंगे।
उन्होंने ये भी कहा है कि दुनिया भर के देशों को कोरोना महामारी के इस संकट में एक साथ काम करने की आवश्यकता है। महामारी से साथ में लड़ाई से ही सफलता मिल सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दक्षिण एशिया को एक क्षेत्रीय इकाई के रूप में काम करने की अपील कर चुके हैं।
एक सवाल पर डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि मौजूदा कोविड-19 संकट के कारण एक महत्वपूर्ण बहस शुरू हुई है जिसमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी व नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका पर सबका ध्यान केंद्रित है। इसने वैश्विक शासन के संदर्भ में कई कमियों का भी खुलासा किया है।