नोएडा के चर्चित आरुषि तलवार- हेमराज हत्याकांड में हाईकोर्ट ने डॉ. राजेश और नूपुर तलवार को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर टिके इस केस में साक्ष्यों की कड़ियां इतनी मजबूत नहीं हैं कि उनके आधार पर दंपति को दोषी ठहराया जा सके। वह संदेह का लाभ पाने के हकदार हैं।
राजेश और नूपुर तलवार को विशेष सीबीआई अदालत गाजियाबाद ने हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। डा. राजेश और नुपुर तलवार ने सजा के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अलग-अलग अपीलें दाखिल की थीं।
न्यायमूर्ति बालाकृष्ण नारायण और न्यायमूर्ति अरविंद मिश्र प्रथम की पीठ ने सीबीआई कोर्ट की उस अवधारणा को खंडित कर दिया कि घटना की रात हत्याकांड वाले फ्लैट में तलवार दंपति ही मौजूद थे और बाहर से किसी तीसरे व्यक्ति के आने की संभावना नहीं है लिहाजा हत्या उन्हीं दोनों ने की है।
कोर्ट ने कहा कि घटना की रात फ्लैट में किसी तीसरे व्यक्ति के आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। सीबीआई के पास अपनी कहानी साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। घटनाओं की तारतम्यता इतनी पुख्ता नहीं है कि उसके आधार पर तलवार दंपति को दोषी ठहराया जा सके। संदेह का लाभ देने के लिहाज से यह एकदम सही केस है।