शासन ने सोलर पावर एनर्जी को बढ़ावा देने की योजना तैयार की है। एक निजी कंपनी के सहयोग से सोलर पावर स्टेशन तैयार किए जाएंगे। इनकी शुरुआत सुल्तानपुर से हो गई है।
सोलर पावर स्टेशनों का निर्माण पावर कारपोरेशन की देखरेख में किया जा रहा है। प्रत्येक जनपद में 25-25 मेगावाट क्षमता के पावर स्टेशन लगाए जाएंगे। इस योजना में गाजियाबाद-बुलंदशहर सहित सूबे के 15 जनपदों को चुना गया है।
बिजली उत्पादन केे संसाधन सीमित हैं और इनका विस्तार भी बड़े स्तर पर नहीं किया जा सकता है। कोयला, पानी और परमाणु के बिजली संयंत्र जरूरत के हिसाब से उपलब्ध नहीं हैं।
शासन का जोर अब सोलर पावर स्टेशनों के निर्माण पर है। गुजरात की एक निजी कंपनी को सूबे में सोलर पावर स्टेशन लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सुल्तानपुर में दो सोलर पावर स्टेशनों का निर्माण शुरू हो गया है। प्रदेश के 15 जनपदों में बनने वाले 25-25 मेगावाट के सोलर पावर स्टेशनों से तैयार एनर्जी को पावर कारपोरेशन खरीदकर सप्लाई करेगा।
तीन चरणों में बनने वाले पावर स्टेशनों में गाजियाबाद व बुलंदशहर को पहले चरण वाले निर्माण में शामिल किया गया है। इन जनपदों में जमीन की उपलब्धता के हिसाब से फरवरी 2016 तक इनका निर्माण शुरू कराया जाना है।
लखनऊ, कानपुर, बनारस, इलाहाबाद, इटावा, मुरादाबाद, मेरठ, सहारनपुर, गोरखपुर, मथुरा, अयोध्या, रामपुर, हापुड़ जनपदों में दो-दो सोलर पावर स्टेशनों का निर्माण कराया जाना है।
सोलर प्लांट से होगा फायदा
सोलर प्लांट से बिना प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किए और बिना प्रदूषण के बिजली मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार इन प्लांटों से करीब 200 साल तक बिना किसी खर्च के बिजली प्राप्त की जा सकती है।
कोयला, जल व परमाणु ऊर्जा के मुकाबले विशेषज्ञ आने वाले दशकों में सौर ऊर्जा को महत्वपूर्ण मान रहे हैं। छोटे-छोटे प्लंट लगाने से ग्रिड ट्रांसमिशन का खर्च भी बचाया जा सकेगा।
एक्सईएन अविनाश गुप्ता के अनुसार 25 मेगावाट से करीब 15 हजार उपभोक्ताओं की बिजली जरूरत पूरी की जा सकती है।...