दिल्ली में कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच बेड की संख्या बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग हर विकल्प पर काम कर रहा है। इसके तहत दिल्ली सरकार ने बैंक्वेंट हॉल, मैरिज हॉल और खेल के मैदानों को कोविड अस्पताल के रूप में विकसित करने की घोषणा की है।
सरकार 20 जून तक 15 हजार बेड तैयार करने की योजना पर काम कर रही है, लेकिन डॉक्टरों का कहना इन स्थानों पर कोविड के बुनियादी स्वास्थ्य ढांचे का विकास करने के लिए बेड के अलावा भी अन्य कई संसाधनों की जरूरत है।
अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर यश गुलाटी का कहना है कि उनके अस्पताल में कोरोना के मरीजों का इलाज चल रहा है। अगले एक दो महीने में कोरोना के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ेगी।
इनमें से लगभग 80 से 90 फीसदी लोगों को घर पर ही रखकर इलाज किया जा सकता है, लेकिन10 प्रतिशत लोगों को अस्पताल में रखने की आवश्यकता होती है। इसलिए सरकार होटल, खेल परिसर और बैंक्वेट हॉल को अस्पताल जैसी सुविधाओं में परिवर्तन कर रही है, लेकिन केवल बिस्तर लगाने से या ऑक्सीजन सप्लाई करने से लोगों को कोविड अस्पताल जैसी सुविधा नहीं मिलेगी।
इसके लिए डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की भी आवश्यकता होगी। सरकार को नए बिस्तर लगाने में कोई दिक्कत नहीं होगी, परंतु चुनौती पर्याप्त संख्या में स्वास्थ्य कर्मचारियों की पूर्ति करना होगी। इसके लिए अभी से कदम उठाने होंगे। क्योंकि, जो डॉक्टर केवल इस प्रकार का इलाज करते हैं। उनकी संख्या भी सीमित हैं, इसलिए बाकी विभाग के डॉक्टरों को भी अभी से ट्रेनिंग दे दी जाए।
इसके अलावा पीपीई किट, दवाइयां, वेंटिलेटर आदि सामान भी पर्याप्त संख्या में चाहिए। इस समय सरकार के पास 585 वेंटिलेटर हैं। सरकार अभी से तैयारी शुरू करेगी तो इस चुनौती का सामना करने में ज्यादा परेशानी नहीं होगी।
प्रमुख अस्पतालों में रेफर होंगे गंभीर मरीज
दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर बीबी बाधवा का कहना है कि सरकार के इस फैसले से लोगों को काफी राहत मिलेगी। काफी लोग ऐसे हैं जिनके पास होम आईसोलेशन में रहने की व्यवस्था नहीं है। उनका इलाज इन स्थानों पर आसानी से किया जा सकेगा। 80 फीसदी मरीजों को अस्पताल की जरूरत नहीं है, लेकिन अगर इन बैंक्वेंट हॉल में रखे गए मरीजों की हालात गंभीर होती है तो उन्हें तुरंत प्रमुख कोविड अस्पतालों में भर्ती कराया जाएगा।