किसी व्यक्ति के लिए पत्नी द्वारा अवैध संबंध के आरोप लगाने से अधिक और कुछ दर्दनाक नहीं हो सकता है। यह कहते हुए हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें उसने तलाक की मांग की थी।
न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग व न्यायमूर्ति योगेश खन्ना की खंडपीठ ने कहा कि अवैध संबंध के आरोप काफी गंभीर होते हैं। कानून का यह तय सिद्धांत है कि अगर यह आरोप झूठे निकलते हैं तो यह क्रूरता है और तलाक का आधार है। अदालत ने कहा कि दंपति का 1995 में विवाह हुआ था और इसी वर्ष के अंत से वे अलग रह रहे हैं और उनकी शादी टूटी हुई है।
1996 में पति ने क्रूरता के आधार पर निचली अदालत में तलाक की अर्जी दाखिल की। 2001 में पत्नी द्वारा सौहार्दपूर्ण तरीके से साथ रहने के आश्वासन के बाद उसने यह याचिका वापस ले ली। याची ने 2009 में फिर यह कहते हुए याचिका दायर की कि उसकी पत्नी उसके साथ रहने नहीं आई।
महिला ने निचली अदालत में याची पर अवैध संबंध व दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया था। निचली अदालत ने उसकी याचिका रद्द कर दी थी। याची ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।