नाजायज संबंध धोखाधड़ी का सबसे बड़ा हथियार है जो एक परिवार को बर्बाद कर देता है। यह एक परिवार को जहन्नुम बना देता है। मौजूदा केस इसका एक उदाहरण है। अदालत ने यह टिप्पणी हत्या के मामले में मृतक की पत्नी व भाई को दोषी ठहराते हुए की है। दोषियों ने साजिश रच कर हत्या को अंजाम दिया था।
कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने मामले में आरोपी शांति शर्मा तथा सतेंद्र शर्मा को हत्या, साक्ष्य नष्ट करने समेत अन्य धाराओं में दोषी करार दिया। इस मामले में दोषियों को मौत की सजा तक प्रावधान है। दोषियों की सजा पर अदालत दस दिसंबर को सुनवाई करेगी।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मृतक दिलीप शर्मा का शव उसके घर में मिला था। इससे साफ है कि उसकी हत्या दोषियों ने योजना बनाकर की थी। अदालत ने इस बात पर गौर किया कि मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था। इनमें सबसे अहम साक्ष्य था कि मृतक का शव उसके घर की सुरक्षित चारदीवारी में मिला था। वहां चोरी या सेंधमारी का कोई साक्ष्य नहीं था। इसके अलावा मृतक की भाभी का वह बयान भी अहम है कि आरोपियों के बीच नाजायज संबंध थे।
मामले की सुनवाई के दौरान आरोपियों ने झूठे मामले में फंसाने का तर्क देते हुए कहा कि दिलीप की मौत सीढ़ियों पर फिसलने और वहां से गिरने से हुई थी। अभियोजन के अनुसार 2015 में दिलीप का शव उत्तर पूर्वी दिल्ली के ब्रह्मपुरी स्थित उसके घर में सीढ़ियों के नजदीक मिला था। उसके चेहरे तथा गर्दन पर चोट के निशान व खून लगा था।