, प्रतिबंध के बावजूद जारी
प्रथम चौहान
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने जून 2023 में अवैध कपड़ों की रंगाई और जींस वॉशिंग इकाइयों पर प्रतिबंध लगाने के बावजूद पूर्वी दिल्ली में चोरी-छिपे यह काम जारी है। इन इकाइयों से निकलने वाला रासायनिक युक्त पानी सीधे नालों में बहाया जा रहा है। यह प्रदूषित पानी यमुना नदी में मिलकर उसे दूषित कर रहा है।
दिल्ली प्रशासन ने किसी भी रंगाई इकाई से केमिकल युक्त पानी सीधे नालों में बहाने पर कड़ा प्रतिबंध लगाया है। कपड़ों की रंगाई और फिनिशिंग में कई खतरनाक रसायनों का उपयोग होता है। इनमें अजो डाइज, सल्फर डाइज, रिएक्टिव और डिस्पर्स डाइज शामिल हैं, जो कैंसरकारी होते हैं और कई देशों में प्रतिबंधित हैं। लिक्विड ब्लीच, हाइड्रोजन पेरोक्साइड और कास्टिक सोडा जैसे अन्य रसायन भी इस्तेमाल किए जाते हैं। रंगाई के बाद यह केमिकल युक्त पानी बिना उपचार के स्थानीय नालों में बहा दिया जाता है। ये नालों के माध्यम से सीधे यमुना नदी जा रहा है। यमुना में दिखने वाले जहरीले सफेद झाग और पानी का लाल-गुलाबी रंग इन्हीं अवैध इकाइयों से निकलने वाले रसायनों का परिणाम है।
स्थानीय निवासियों की शिकायतें
सीलमपुर, गांधी नगर और मुस्तफाबाद जैसे घने इलाकों में कई छोटी अवैध इकाइयां बिना किसी उपचार संयंत्र के चल रही हैं। सीलमपुर निवासी अकरम ने बताया कि गंदा पानी नालियों में जाता है। गौरव ने कहा कि रंगाई वाले इलाकों के आसपास नालियों में पानी का रंग असामान्य दिखता है और रासायनिक गंध आती है। आशीष ने घनी आबादी के बीच दुर्गंध, गंदगी और प्रदूषित पानी की समस्या बताई। उन्होंने प्रशासन से नियमित निगरानी की मांग की।
कानूनी प्रावधान और उल्लंघन
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के कड़े आदेश हैं। इन आदेशों के अनुसार, किसी भी रंगाई इकाई से केमिकल युक्त पानी सीधे नालों में नहीं बहाया जा सकता। औद्योगिक क्षेत्रों में इसके लिए सीईटीपी लगाए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रशासन कड़ी कार्रवाई करेगा।