हाईकोर्ट ने आईआईटी दिल्ली को यौन उत्पीड़न के मामले में एक प्रोफेसर के खिलाफ शिकायत पर आठ सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
छात्रा ने प्रोफेसर के खिलाफ आंतरिक शिकायत समिति के समक्ष पीछा करने का आरोप लगाया था। समिति ने इस आरोप को सही पाया था और रिपोर्ट अनुशासन समिति के पास लंबित है।
न्यायमूर्ति विभू बाखरू ने याचिका का निपटारा करते हुए शिकायत पर त्वरित निर्णय लेने का निर्देश अनुशासन समिति को दिया है। कोर्ट ने कहा कि पीड़ित छात्रा समिति के निर्णय से सहमत नहीं होती तो वह दोबारा कोर्ट आ सकती है।
हाईकोर्ट ने यह निर्देश पीड़ित छात्रा की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है। याचिका में कहा गया था कि आंतरिक शिकायत समिति की रिपोर्ट पर कार्रवाई करने का निर्देश आईआईटी के बोर्ड ऑफ गवर्नर (अनुशासन समिति) को दिया जाए।
याचिका के मुताबिक पीड़िता की शिकायत पर आंतरिक शिकायत कमेटी ने अपनी रिपोर्ट बोर्ड ऑफ गवर्नर को सौंप दी थी। आईआईटी के वकील ने कोर्ट के समक्ष कहा कि बोर्ड ने समिति की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद यह पाया है कि पीछा करने के आरोपों की पुष्टि का पर्याप्त आधार नहीं है।
इसके मद्देनजर आरोपी प्रोफेसर को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है। इस पर जो भी निर्णय होगा उससे पीड़िता को अवगत करवाया जाएगा।