लगातार 3 महीने पहनने पर भी नहीं होगी स्वच्छता की समस्या
इस यूनिफार्म को एंटी-माइक्रोबिअल कपड़े से तैयार किया गया है। सियाचिन में एक जवान इसे लगातार 3 से 4 महीने तक पहन सकता है। इससे अंदर की लेयर जो सीधे त्वचा के संपर्क में होगी। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यूनिफार्म को लगातार पहनने के बाद जवान को चकते या खुजली नहीं होगी। यह यूनिफार्म बैक्टीरियल परीक्षण में भी खरी उतरी है। इसे करीब 30 बार धोया जा सकता है।
झेल सकती है स्नाइपर की 8 गोलियां
बीआईएस लेवल 6 के तहत तैयार जैकेट साइज में चौड़ी, वजन में कम और स्नाइपर की 8 गोलियां झेल सकती है। उदाहरण के तौर पर विदेशी जैकेट बनाने के दौरान ट्रायल में स्नाइपर के 3 शॉट पर परख होती है, जबकि हमारी स्वदेशी जैकेट 8 शॉटस को भी आराम से झेल गई। वहीं, बीआईएस लेवल 5 के तहत तैयार जैकेट एके 47 की 8 गोलियां झेल गई।
रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा देश : राजनाथ
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत आधुनिक हथियारों और प्रौद्योगिकी के मामले में पीछे रह गया था, लेकिन मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद यह रक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व गति से आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रहा है। आईआईटी दिल्ली में इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के वार्षिक सम्मेलन में उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध प्रणाली तेजी से बदल रही है। भविष्य और राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए उच्च स्तरीय प्रौद्योगिकी अपनाने की जरूरत है। रक्षा मंत्री ने वैज्ञानिकों और इंजीनियरों से बदलते समय के अनुरूप कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों पर विशेषज्ञता हासिल करने का आह्वान किया।
अभी 10.50 किलो वजन की विदेशी बुलेटप्रूफ जैकेट का होता है इस्तेमाल
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिक प्रोफेसर नरेश भटनागर ने बताया कि भारतीय सेना अभी सियाचिन में तैनाती के दौरान बीआईएस लेवल 5 के तहत 10.50 किलो वजन की विदेशी बुलेटप्रूफ जैकेट का इस्तेमाल करती है। बेशक देखने में वजन ढाई किलो कम हुआ है, लेकिन सियाचिन में जवान को बर्फ, पहाड़ व बेहद दुर्गम चढ़ाई के बीच काम करना पड़ता है। ऐसे में यूनिफार्म के वजन का एक-एक ग्राम कम होना मानसिक व शारीरिक रूप से बेहद मायने रखता है।
अब 1200 डिग्री आग में 20 सेकंड तक लोगों को बाहर निकाल सकेंगे...
अब दमकल कर्मियों के पास 1200 डिग्री आग में घिरे लोगों को निकालने के लिए 20 सेकंड का समय होगा। अभी तक विदेशों से आने वाली विशेष अग्निश्मन ड्रेस पहनकर सिर्फ चार सेकंड तक लोगों को निकाल सकते थे। आईआईटी के वैज्ञानिकों ने ‘एक्सट्रीम प्रोटेक्टिव क्लाथिंग’ बनाने में सफलता हासिल की है। इस विशेष ड्रेस का वजन सिर्फ दो किलो है। डीआरडीओ ने इस ड्रेस को तैयार करने के लिए 3 इंडस्ट्री का चयन किया है। इसके अगले साल तक दमकल कर्मियों के पास उपलब्ध होने की उम्मीद है।