Retired Colonel and ADM Dispute
शहर के लोग लगातार प्राधिकरण अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इसी वजह से बुधवार सुबह करीब 11 बजे डीएम कैंप कार्यालय पर मेरठ मंडलायुक्त अनीता मेश्राम और आईजी रेंज रामकुमार दोबारा जांच करने पहुंचे। उन्होंने डीएम बीएन सिंह, एसएसपी डॉ. अजयपाल शर्मा, एडीएम, एसपी सिटी और एसडीएम समेत कई अधिकारियों के साथ करीब छह घंटे तक बैठक की। इसके अलावा प्राधिकरण के अफसरों से पूरे प्रकरण में चली फाइल को पेश करने के लिए कहा।
ओएसडी राजेश कुमार सिंह, ओएसडी संतोष कुमार और सीनियर मैनेजर एससी मिश्रा आदि अधिकारी फाइल लेकर डीएम आफिस पर पहुंचे, लेकिन मंडलायुक्त ने मामले की अधूरी फाइल देखी तो वह नाराज हो गईं और तीनों अधिकारियों पर बिफर गईं।
उन्होंने कहा कि जब निर्देश के बाद भी वह उनके सामने पूरी फाइल नहीं रख पा रहे हैं तो आम जनता की समस्याओं को कैसे दूर करते होंगे। उन्होंने फटकार लगाते हुए तीनों अधिकारियों को वापस भेजा और पुन: फाइल को पूरा करके लाने के लिए कहा। तीनों अफसर भागे-भागे प्राधिकरण गए और जो विवाद के लिए पत्रावली चली थी उसे पूरा करके करीब डेढ़ घंटे बाद लेकर पहुंचे। वहीं, शासन को भेजने के लिए पुलिस की जांच रिपोर्ट भी आईजी ने ली है।
रिटायर्ड कर्नल और एडीएम के विवाद में एसपी क्राइम को जांच मिली है और वही पूरे प्रकरण की विवेचना कर रहे हैं। एसपी अशोक कुमार सिंह ने बताया कि वह पूरे मामले में गवाह और सीसीटीवी फुटेज आदि का संकलन कर रहे हैं। अभी केवल रिटायर्ड कर्नल के बयान दर्ज किए हैं।
हालांकि, उसमें करीब 15 पेज हैं और बयान करीब 9 घंटे में दर्ज किए गए हैं। उन्होंने रिटायर्ड कर्नल के घर पर रहने वाले जिन लोगों को जेल भेजा गया था उनके भी बयान दर्ज करने की बात कही है, ताकि उनको बुलाया जा सके। बुधवार को भी वह रिटायर्ड कर्नल के घर गए और उनसे बातचीत की।
एसपी ने सेक्टर-20 पुलिस से थाने की सीसीटीवी फुटेज भी मांगी है। रिटायर्ड कर्नल ने अपने बयान में पुलिस पर थाने में अभद्रता करने का भी आरोप लगाया है, लेकिन पुलिस ने जानकारी दी है कि यह उनके सरकारी दस्तावेज में दर्ज है कि सीसीटीवी कैमरे नहीं चल रहे हैं, इसलिए उसकी कॉपी मांगी गई है।
रिटायर्ड कर्नल और उनके परिवार ने पुलिस द्वारा एडीएम के कहने पर किए गए मुकदमे को समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पूरा मामला एडीएम की शह से प्रेरित था और उनका एडीएम से निजी रूप से कोई विवाद नहीं था।
वह तो केवल अतिक्रमण की शिकायत कर रहे थे। इसलिए उन पर किया गया मुकदमा फर्जी है और इसी कारण उनको जबरन जेल भिजवाया गया था। हालांकि, एसपी ने इस बात से फिलहाल इंकार किया है कि वह दोनों पक्ष के बयान दर्ज करके बाद ही आगे की कार्रवाई करेंगे।