साइबर एक्सपर्ट अनुज अग्रवाल ने बताया कि अक्सर बैंक खाता खोेलने के बाद मास्टर कार्ड और वीजा कॉर्ड ही उपभोक्ताओं को देता है। यह उपभोक्ता की मांग भी होती है। लेकिन जानकर हैरानी होगी कि यूरोप व ईस्ट के देशों में वीजा या मास्टर कॉर्ड से ट्रांजेक्शन के लिए ओटीपी की जरूरत नहीं पड़ती।
वहां कॉर्ड नंबर और एक्सापाइरी डेट व सीवीवी नंबर से ही ट्रांजेक्शन किया जा सकता है। इस मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ। अगर उपभोक्ता कुछ विशेष बातों का ध्यान रखें, तो साइबर अपराध पर रोक लगाई जा सकती है। लेकिन ऐसा कभी नहीं होता है कि इनसे संबंधित मामले साइबर सेल में न आए। रोजाना साइबर ठग लाखों रुपये की सेंध लगा रहे हैं।
इस तरह से लोगों को बनाते हैं ठगी का शिकार
-कार्ड की क्लोनिंग कर खाते से रुपये निकालते हैं
-4जी में बदलने के बहाने सिम को स्कैन कर लेते हैं
-मोबाइल पर ओटीपी व लिंक भेजते हैं
-फोन कर झांसे में लेकर खाते से संबंधित जानकारी लेते हैं
-लुभावने ऑफर देकर खाते में रुपये डलवाते हैं
-इंश्योरेंस के नाम पर घर जाकर साइन किया हुआ चेक लेते हैं
-पेटीएम खाते की जानकारी लेकर रुपये उड़ा लेते हैं
-मेल आईडी को हैक करके पूरी जानकारी हासिल करते हैं
-एटीएम बूथ पर कार्ड बदलकर रुपये निकाल लेते हैं।