अब ‘खेल-खेल’ में ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बनेगा, बल्कि कड़े टेस्ट से गुजरना होगा। एक छोटी सी गलती आपको अयोग्य साबित कर देगी।
बंगलूरू की तरह नोएडा में भी ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर टेस्ट लेने के बाद लाइसेंस जारी करने की योजना पर काम शुरू हो गया है। प्रदेश के परिवहन आयुक्त ने नोएडा में ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक बनाने को कहा है।
दो एकड़ एरिया में बनने वाले इस ट्रैक में वे सारे नियम-कायदे होंगे, जिनका सामना वाहन चालकों को सड़क पर चलने के दौरान करना पड़ता है। ट्रैफिक सिग्नल, लेन, डिवाइडर, यू-टर्न, लेफ्ट टर्न, राइट टर्न, फ्लाईओवर, अंडरपास डिवाइडर आदि बने होंगे। खास बात यह है कि पूरे ट्रैक पर सेंसर लगा होगा। टेस्ट के दौरान अगर आवेदक छूटी सी भी चूक करेगा तो तुरंत पता चल जाएगा।
कंप्यूटर उसकी कमी बता देगा, जिसके बाद लाइसेंस नहीं बन सकेगा। इस तरह का ट्रैक बंगलूरू में पहले से ही बना हुआ है। परिवहन आयुक्त के निर्देश पर पंजीयन अधिकारी महेश शर्मा ने बंगलूरू जाकर इसका निरीक्षण भी किया है।