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अगर पत्नी करेगी हनीमून खराब तो हो सकती है उसकी जिंदगी बर्बाद, हाईकोर्ट ने कहा मिल जाएगा तलाक 

Mon, 10 Oct 2016 01:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि यदि हनीमून खराब होता है और पत्नी ससुराल पक्ष पर झूठे आरोप लगाती है तो यह मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। ऐसे में तलाक का आधार बनता है।
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अदालत ने ऐसे ही एक मामले को अपवाद की संज्ञा देते हुए कहा कि दंपति की शादी शुरू से ही सही नहीं चल सकी जो शादी के समय 30 साल से अधिक उम्र के थे और ठीकठाक परिपक्व थे।

न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग व न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी की खंडपीठ ने 12 साल पुराने शादी के बंधन को तोडने यानि तलाक की अनुमति देते हुए कहा कि पति और पत्नी कड़वी यादों के साथ आये हैं और उनका हनीमून भी खराब हो गया था।
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पति पर मानसिक क्रूरता बना तलाक का आधार

जहां महिला ने शादी होने का विरोध किया था और बाद में पति और उसके परिवार वालों पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।

खंडपीठ ने यह टिप्पणी महिला द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए की। महिला ने परिवार अदालत द्वारा उसके पति की याचिका पर इस मामले को मानसिक क्रूरता मानते हुए तलाक प्रदान करने का निर्णय किया था। महिला ने फैसले को चुनौती देत हुए कहा था कि यह फैसला गलत है। 

खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा प्रतिवादी-पति यह साबित करने में सफल रहा कि उनके हनीमून के दौरान पत्नी ने न केवल शादी होने का विरोध किया बल्कि बाद में उसके और उसके पूरे परिवार के खिलाफ शर्मिंदा करने वाले और अपमानजनक आरोप लगाये।

हनीमून खराब होने के बावजूद पति ने बचानी चाही शादी

खंडपीठ ने कहा कि महिला का आचरण इस तरह का है कि पुरष के लिए इस तरह की क्रूरता सह पाना मुमकिन नहीं था। अदालत ने कहा कि सभी साक्ष्यों से स्पष्ट है कि पति ने हनीमून खराब होने के बावजूद अपने विवाह को बचाने के लिए कई प्रयास किए।

इतना ही नहीं पत्नी के घर जाकर उसके माता-पिता बातचीत की ताकि कोई समाधान निकल सके। अदालत ने माना कि पति ने असाधारण धैर्य दिखाया लेकिन उनके बीच बात नहीं बनी।

अदालत ने इस बात को संज्ञान में लिया कि जनवरी 2004 में शादी हुई और महिला ने अप्रैल 2004 में अपना ससुराल छोड़ दिया और बाद में उसने अपने पति और उसके परिजनों के खिलाफ  मामला दर्ज कराया।
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हनीमून का समय खुद को समझने का अच्छा अवसर

- फोटो : डेमो फोटो
अदालत ने कहा कि दोनों का परिवार की रजामंदी से विवाह हुआ वे 30 वर्ष की आयु से अधिक के थे। अदालत ने कहा कि हनीमून का समय पति-पत्नी को एक दूसरे को जानने-समझने के लिए एक अच्छा अवसर मिलता है वे एक दूसरे के करीब आते है।

यह मामला एक अपवाद है, वे विवाह के एक दिन बाद ही हनीमून के लिए शिमला गए और कड़वी यादें और एक खराब हनीमून के साथ लौट आए।
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