शनिवार सुबह सिहानी गेट कोतवाली पहुंचे एक बुजुर्ग ने बेटों पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। कहा कि उनके बेटे उन्हें पागल कहते हैं। परेशान करते हैं। वे दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।
पुलिस ने उन्हें कार्रवाई का आश्वासन देकर टरका दिया। ये कहानी इस अकेले बुजुर्ग की नहीं है, ऐसे कितने ही मामले हर रोज पुलिस और प्रशासनिक अफसरों के पास आते हैं।
लेकिन उन्हें राहत नहीं मिलती। मिलता है तो सिर्फ आश्वासन। लेकिन अगर औलादें नालायक निकल गई हैं तो अब पुलिस-प्रशासन बुजुर्गों की ‘लाठी’ बनेगा। उन्हें गुजारा भत्ता दिलाने में मदद करेगा।
यूपी सरकार ने इसके लिए नियमावली बना दी है। इसके लिए तहसील से लेकर जिला स्तर पर अपीलीय अधिकरण के गठन की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस फैसले से इन बुजुर्गों को राहत मिलेगी। गाजियाबाद में भी ऐसे बुजुर्गों की कमी नहीं है, जिन्हें औलादों ने घर से निकाल दिया है या परेशान करते हैं।
पिछले एक साल में पुलिस और प्रशासनिक अफसरों के पास ऐसी 113 शिकायतें आई हैं, जिनमें माता-पिता ने बेटों पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। इससे पुलिस और प्रशासनिक अफसर भी इत्तेफाक रखते हैं कि ऐसे भी बहुत मामले हैं, जिनमें बुजुर्ग शिकायत भी नहीं कर पाते हैं।
ये लिया गया निर्णय
- भरण-पोषण अधिकरण एवं अपीलीय अधिकरण के गठन का आदेश जारी किया गया।
- मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश भेजे।
- यदि कोई लड़का या लड़की अपने माता-पिता को घर से निकाल देता है और उसके रहने के लिए कोई सहारा नहीं होता है तो अधिकरण मामले की सुनवाई का गुजारा भत्ता तय करा सकती है।
- गुजारा भत्ता 10,000 रुपये महीने तक भी हो सकता है
- तहसीलों में उप खंड अधिकारी और जिला स्तर पर जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में अपीलीय अधिकरण का गठन किया जाएगा।
- अधिकरण मामले की सुनवाई करने के बाद बुजुर्गों को न्याय दिलाएगा।
- जिला समाज कल्याण अधिकारियों को इसके लिए भरण-पोषण अधिकारी नामित किया गया है।