- पीड़िता के नाबालिग होने के कारण केस रद्द करने से हाईकोर्ट ने किया इन्कार
- 17 साल 11 महीने की पीड़िता ने बाद में आरोपी से शादी कर ली, पिता ने अपहरण और दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने कहा है कि नाबालिग लड़की के साथ लगभग वयस्क होने के बावजूद सहमति से बने यौन संबंध को वैध नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने 17 वर्ष 11 महीने की लड़की के साथ संबंध बनाने के आरोपी युवक के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज केस को रद्द करने से इन्कार कर दिया।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ ने अपने फैसले में कहा कि कानून में 18 साल से कम उम्र की लड़की को बच्चा माना गया है। भले ही वह शारीरिक और मानसिक रूप से परिपक्व लगे, भले ही रिश्ता आपसी सहमति से हो और दोनों शादी करना चाहते हों, लेकिन पॉक्सो कानून के तहत यह अपराध है। इसे वैध करने का कोई आधार नहीं है। कानून में लगभग वयस्क जैसा कोई अपवाद नहीं है।
जानकारी के अनुसार, साल 2022 में लड़की के पिता ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी 17 साल 11 महीने की बेटी को 23 वर्षीय युवक भगा कर ले गया। लड़की को बरामद करने पर उसने बताया कि दोनों प्यार करते हैं और शादी करना चाहते हैं। उसके बाद भी पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज किया। आरोपी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर केस रद्द करने की मांग की। उसका तर्क था कि लड़की ने स्वेच्छा से उसके साथ संबंध बनाए और अब दोनों शादीशुदा हैं तथा एक बच्चे के माता-पिता भी बन चुके हैं।
कोर्ट ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा
- पॉक्सो कानून का मकसद बच्चों का यौन शोषण रोकना है, न कि वयस्कों के बीच सहमति वाले रिश्तों को नियंत्रित करना।
- 18 साल से एक दिन कम उम्र होने पर भी कानून पूरी तरह लागू होता है लगभग वयस्क जैसा कोई अपवाद नहीं है।
- सहमति का दावा और बाद में शादी हो जाना अपराध को मिटा नहीं सकता।