एनआरआई द्वारा विवाह के नाम पर युवतियों के साथ धोखाधड़ी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार कड़े प्रावधान करने जा रही है। इस संबंध में सोमवार को राज्यसभा में ‘द रजिस्ट्रेशन ऑफ मैरिज ऑफ नॉन रेजिडेंट इंडियंस बिल, 2019’ पेश किया गया।
बिल में प्रावधान है कि किसी भी एनआरआई के भारतीय युवती से विवाह का पंजीयन शादी की तारीख से 30 दिन के भीतर करवाना अनिवार्य होगा, चाहे युवती भारत में रह रही हो अथवा खुद भी एनआरआई हो।
ऐसा नहीं करवाने पर उसका पासपोर्ट जब्त अथवा रद्द भी किया जा सकेगा। इतना ही नहीं, कोर्ट को ऐसे एनआरआई की चल-अचल संपत्ति जब्त करने का भी अधिकार होगा जो कानून के समक्ष उपस्थित नहीं होने पर अपराधी घोषित किया जा चुका है।
बिल के अनुसार यदि कोई एनआरआई भारत में विवाह करता है तो उसे यहां पंजीयन करवाना होगा। यदि वह किसी एनआरआई युवती से विदेश में विवाह करता है तो उसे उस देश में संबंधित अधिकारी के समक्ष रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होगा।
आरोपी एनआरआई को कोर्ट एक विशेष वेबसाइट के जरिये समन और वारंट भेज सकेंगे। यह वेबसाइट विदेश मंत्रालय संचालित करेगा। पासपोर्ट जब्त अथवा निरस्त करने का अधिकार देने के लिए पासपोर्ट एक्ट और कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर में संशोधन किया जाएगा। विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार जनवरी, 2015 से नवंबर, 2017 के बीच एनआरआई द्वारा शादी के नाम पर धोखाधड़ी के 3,328 शिकायतें मिलीं।
संसद का बजट सत्र बुधवार को समाप्त होगा। यह लोकसभा चुनावों से पहले अंतिम सत्र भी है। ऐसे में बिल के पारित होने की संभावना कम ही बताई जा रही है। यह बिल राज्यसभा में पेश किया गया, लेकिन यह पारित नहीं भी हुआ तो भी मौजूदा लोकसभा के भंग होने पर निरस्त नहीं होगा। सोलहवीं यानी वर्तमान लोकसभा का कार्यकाल 3 जून तक है।