फरीदाबाद में कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर और नवल गिरी ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि यमुना साफ नहीं हुई तो वे जलसमाधि ले लेंगे। उन्होंने यमुना भक्तों का हाथ उठवाकर पूछा कि इस निर्णय से आप लोग सहमत हैं या नहीं तो अधिकांश लोगों ने हाथ उठाकर उनका समर्थन किया।
देवकीनंदन ने कहा कि या तो हथिनीकुंड से यमुना का पनी छोड़ दो या फिर जलसमाधि लेने का मौका दो। इस नदी को पवित्र बनाए रखने के लिए संत समाज हर कुर्बानी देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि इस देश में आत्महत्या करना अपराध है, लेकिन वे यमुना के लिए ऐसा करने को तैयार हैं, तभी सरकार कुछ सुनेगी। उन्होंने कहा कि तमाम देशों के लोग नदियों को बचाने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने यमुना बचाने के लिए भी समर्थन दिया है, लेकिन केंद्र सरकार अभी सुन नहीं रही है।
वृंदावन से आए नवल गिरी महाराज ने भी देवकीनंदन की ही बात आगे बढ़ाई। उन्होंने कहा कि यमुना को अविरल नहीं किया गया तो वह हथिनीकुंड बैराज में जल समाधि लेंगे। सरकार स्वच्छता अभियान चला रही है, लेकिन नदियों को साफ करना भूल गई। एक कथावाचक ने तो यहां तक कहा कि अब समय एक हाथ में माला और दूसरे में भाला लेने का है। इन लोगों के विचार के विपरीत उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री लक्ष्मी नारायण ने कहा कि हम आत्महत्या नहीं सुदर्शन चक्र मांगते हैं।
यमुना मुक्ति के लिए लगी धर्म संसद
फरीदाबाद में एक संसद दिल्ली में चल रही थी तो दूसरी यमुना मुक्ति के लिए बृहस्पतिवार को सराय ख्वाजा के पास चली। यह नेताओं की नहीं बल्कि धर्म संसद थी, जिसमें धर्माचार्यों और मनीषियों ने यमुना की अविरल धार के लिए हुंकार भरी।
पृथला से पैदल यात्रा की जगह यमुना मुक्ति दूत वाहनों से बदरपुर पहुंचे। करीब 10 बजे रवाना हुए भक्त 11:30 बजे सराय ख्वाजा के पास रुके। यहां आनन-फानन में मंच बना और उस पर संत आने शुरू हो गए। दोपहर 1: 00 बजे धर्म संसद शुरू हुई। संतों ने यमुना मुक्तिकरण पर विचार रखे। इस दौरान सरकार की ओर से वार्ता के प्रयास किए गए। फैक्स आते रहे, लेकिन बात नहीं बनी। यमुना भक्तों का जनसैलाब बार-बार यमुना की धारा छोड़ दो, हथिनीकुंड को तोड़ दो के नारे लगाता रहा।
इस मौके पर पंकज बाबा ने कहा कि सरकार यमुना के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। गंगा को प्राथमिकता मिल रही है और यमुना की बात ही नहीं हो रही। केंद्र सरकार इन्वायरमेंट प्रोटक्शन एक्ट के तहत नोटिफिकेशन जारी करके यमुना की अविरल धार सुनिश्चित कर सकती है। इसका अनुपालन करने के लिए हर राज्य बाध्य होगा। इसी एक्ट के तहत सरकार ने ताजमहल को बचाने के लिए उसके आसपास हजारों फैक्ट्रियां बंद करवाई थीं।
जब ताज के लिए इस एक्ट का इस्तेमाल हो सकता है तो फिर यमुना के लिए क्यों नहीं। उन्होंने कहा कि इस एक्ट के तहत यमुना बचाने का लिखित आश्वासन देने के बाद ही भक्त वापस जाएंगे, वरना दिल्ली में प्रवेश तय है। इसीलिए हम बॉर्डर पर आकर सरकार को संदेश दे रहे हैं। पंकज बाबा ने कहा कि हमें ऐसा समझौता नहीं चाहिए, जिसमें कुछ दिनों के लिए हथिनीकुंड बैराज का फाटक खोलकर बंद कर दिया जाए, बल्कि हमेशा के लिए निर्णय चाहिए। इसमें इतना पानी हो कि इलाहाबाद तक इसकी धारा न रुके।
इस मौके पर साध्वी ऋतंभरा, भारतीय किसान यूनियन (भानू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह, आचार्य डॉ. लोकेश मुनि, गीता मनीषी ज्ञानानंद, पुरुषोत्तम दास महाराज, देवकीनंदन ठाकुर, विजय कौशल, डॉ. लोकेश मुनि, वासुदेवानंद सरस्वती, महंत पुरुषोत्तम महाराज और नवल गिरी जैसे कई संत मौजूद रहे। सबने एक सुर में कहा कि यमुना सिर्फ एक नदी नहीं बल्कि लोगों की आस्था भी है। यह हमारी संस्कृति है, इसे बचाने के लिए सरकार काम करे। संतों ने कहा कि इस समय केंद्र और हरियाणा में भाजपा की सरकार है, उत्तर प्रदेश सरकार भी मदद का आश्वासन दे रही है, ऐसे में यमुना को स्वच्छ करके सरकार उसमें पानी का स्वाभाविक बहाव सुनिश्चित करे।